ख्वाब Poetry (page 18)

जब कभी मेरे क़दम सू-ए-चमन आए हैं

हसन नईम

गया वो ख़्वाब-ए-हक़ीक़त को रू-ब-रू कर के

हसन नईम

दिल में उतरोगे तो इक जू-ए-वफ़ा पाओगे

हसन नईम

दिल में हो आस तो हर काम सँभल सकता है

हसन नईम

बिछ्ड़ें तो शहर भर में किसी को पता न हो

हसन नईम

बयान-ए-शौक़ बना हर्फ़-ए-इज़्तिराब बना

हसन नईम

आरज़ू थी कि तिरा दहर भी शोहरा होवे

हसन नईम

कोई ग़मगीं कोई ख़ुश हो कर सदा देता रहा

हसन नज्मी सिकन्दरपुरी

यक़ीन टूट चुका है गुमान बाक़ी है

हसन कमाल

सब की बिगड़ी को बनाने निकले

हसन कमाल

कल ख़्वाब में देखा सखी मैं ने पिया का गाँव रे

हसन कमाल

हुस्न जब मक़्तल की जानिब तेग़-ए-बुर्राँ ले चला

हसन बरेलवी

जो नक़्श-ए-बर्ग-ए-करम डाल डाल है उस का

हसन अज़ीज़

ख़ला के दश्त में ये तुर्फ़ा माजरा भी है

हसन अख्तर जलील

दिल की तरफ़ निगाह-ए-तग़ाफ़ुल रहा करे

हसन अख्तर जलील

आरज़ू की हमा-हामी और मैं

हसन अख्तर जलील

उसे शिकस्त न होने पे मान कितना था

हसन अकबर कमाल

पाया जब से ज़ख़्म किसी को खोने का

हसन अकबर कमाल

हुनर जो तालिब-ए-ज़र हो हुनर नहीं रहता

हसन अकबर कमाल

हो तेरी याद का दिल में गुज़र आहिस्ता आहिस्ता

हसन अकबर कमाल

ग़म-ए-जाँ गुम ग़म-ए-दुनिया में तो होना मुश्किल

हसन अकबर कमाल

दुनिया में कितने रंग नज़र आएँगे नए

हसन अकबर कमाल

उम्मीद का बाब लिख रहा हूँ

हसन आबिदी

कौन देखे मेरी शाख़ों के समर टूटे हुए

हसन आबिदी

दिल की दहलीज़ पे जब शाम का साया उतरा

हसन आबिदी

वो ब'अद-ए-मुद्दत मिला तो रोने की आरज़ू में

हसन अब्बासी

कभी जो आँखों के आ गया आफ़्ताब आगे

हसन अब्बासी

सुनहरे ख़्वाब आँखों में बुना करते थे हम दोनों

हसन अब्बासी

रात ये कौन मिरे ख़्वाब में आया हुआ था

हसन अब्बासी

ख़्वाब अपने मिरी आँखों के हवाले कर के

हसन अब्बासी