ख्वाब Poetry (page 16)
न सही गर उन्हें ख़याल नहीं
हसरत मोहानी
हम ने किस दिन तिरे कूचे में गुज़ारा न किया
हसरत मोहानी
हर हाल में रहा जो तिरा आसरा मुझे
हसरत मोहानी
हाइल थी बीच में जो रज़ाई तमाम शब
हसरत मोहानी
दिल को ख़याल-ए-यार ने मख़्मूर कर दिया
हसरत मोहानी
बरकतें सब हैं अयाँ दौलत-ए-रूहानी की
हसरत मोहानी
बाम पर आने लगे वो सामना होने लगा
हसरत मोहानी
और भी हो गए बेगाना वो ग़फ़लत कर के
हसरत मोहानी
आप ने क़द्र कुछ न की दिल की
हसरत मोहानी
नज़र उस पर फ़िदा है जिस की ताबानी नहीं जाती
हसरत कमाली
हर्फ़-ए-इंकार कि इक़रार-ए-वफ़ा था क्या था
हसरत देवबंदी
इश्क़ में ख़्वाब का ख़याल किसे
हसरत अज़ीमाबादी
मेरी उस प्यारी झब से आँख लगी
हसरत अज़ीमाबादी
इन दोनों घर का ख़ाना-ख़ुदा कौन ग़ैर है
हसरत अज़ीमाबादी
है याद तुझ से मेरा वो शर्ह-ए-हाल देना
हसरत अज़ीमाबादी
अज़ीज़ो तुम न कुछ उस को कहो हुआ सो हुआ
हसरत अज़ीमाबादी
आता हूँ जब उस गली से सौ सौ ख़्वारी खींच कर
हसरत अज़ीमाबादी
भरे सफ़र में घड़ी-भर का आश्ना न मिला
हसनैन जाफ़री
गरचे हल्का सा धुँदलका है तसव्वुर भी तिरा
हसनैन आक़िब
किस के दिल में बसता हूँ
हसनैन आक़िब
ख़ाना-ए-दिल कि मोअत्तर भी बहुत लगता है
हसनैन आक़िब
तिरे ख़याल तिरी आरज़ू से दूर रहे
हाशिम रज़ा जलालपुरी
मज़हब-ए-इश्क़ में शजरा नहीं देखा जाता
हाशिम रज़ा जलालपुरी
बहुत दिन तक कोई चेहरा मुझे अच्छा नहीं लगता
हाशिम रज़ा जलालपुरी
निगाहें झुक गईं आया शबाब आहिस्ता आहिस्ता
हाशिम अली ख़ाँ दिलाज़ाक
हमारे ख़्वाब सब ताबीर से बाहर निकल आए
हसीब सोज़
जीना मुझे कठिन हो कि मरना मुहाल हो
हसन सोज़
फिर नए ख़्वाब बुनें फिर नई रंगत चाहें
हसन रिज़वी
न वो इक़रार करता है न वो इंकार करता है
हसन रिज़वी
मोहब्बत का अजब ज़ाविया है
हसन रिज़वी