ख्वाब Poetry (page 14)

कभी आहें कभी नाले कभी आँसू निकले

होश तिर्मिज़ी

पहले तो ख़्वाब ज़ेहन में तश्कील हो गया

हीरानंद सोज़

मैं सोचता हूँ इस लिए शायद मैं ज़िंदा हूँ

हिमायत अली शाएर

तज़ाद

हिमायत अली शाएर

मुद्दत के बाद

हिमायत अली शाएर

हरीफ़-ए-विसाल

हिमायत अली शाएर

बगूला

हिमायत अली शाएर

अन-कही

हिमायत अली शाएर

तख़ातुब है तुझ से ख़याल और का है

हिमायत अली शाएर

मेरा शुऊ'र मुझ को ये आज़ार दे गया

हिमायत अली शाएर

मंज़िल के ख़्वाब देखते हैं पाँव काट के

हिमायत अली शाएर

इस शहर-ए-ख़ुफ़्तगाँ में कोई तो अज़ान दे

हिमायत अली शाएर

चाँद ने आज जब इक नाम लिया आख़िर-ए-शब

हिमायत अली शाएर

अपना अंदाज़-ए-जुनूँ सब से जुदा रखता हूँ मैं

हिमायत अली शाएर

वक़्त ने रंग बहुत बदले क्या कुछ सैलाब नहीं आए

हिलाल फ़रीद

कभी तो सेहन-ए-अना से निकले कहीं पे दश्त-ए-मलाल आया

हिलाल फ़रीद

आँखों में वो ख़्वाब नहीं बसते पहला सा वो हाल नहीं होता

हिलाल फ़रीद

शब-ए-फ़िराक़ कुछ ऐसा ख़याल-ए-यार रहा

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

कभी ये फ़िक्र कि वो याद क्यूँ करेंगे हमें

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

वो शोख़ बाम पे जब बे-नक़ाब आएगा

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

तुम भी निगाह में हो अदू भी नज़र में है

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

शब-ए-फ़िराक़ कुछ ऐसा ख़याल-ए-यार रहा

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

ज़िंदगी से मिली सौग़ात ये तन्हाई की

हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी

मिरे शाने पे रहने दो अभी गेसू ज़रा ठहरो

हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी

दिल में इक शोर उठाते हैं चले जाते हैं

हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी

नज़रों में हुस्न दिल में तुम्हारा ख़याल है

हीरा लाल फ़लक देहलवी

हैरान सारा शहर था जिस की उड़ान पर

हज़ीं लुधियानवी

जो मय-कदे में बहकते हैं लड़खड़ाते हैं

हयात वारसी

वो बद-दुआ उसे समझे अगर दुआ लिक्खूँ

हयात लखनवी

वहम-ओ-गुमाँ में भी कहाँ ये इंक़िलाब था

हयात लखनवी