ख्वाब Poetry (page 13)

रात के ख़्वाब सुनाएँ किस को रात के ख़्वाब सुहाने थे

इब्न-ए-इंशा

'इंशा'-जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या

इब्न-ए-इंशा

हमें तुम पे गुमान-ए-वहशत था हम लोगों को रुस्वा किया तुम ने

इब्न-ए-इंशा

दिल किस के तसव्वुर में जाने रातों को परेशाँ होता है

इब्न-ए-इंशा

तूफ़ाँ कोई नज़र में न दरिया उबाल पर

हुसैन माजिद

शाम छत पर उतर गई होगी

हुसैन माजिद

माहौल से जैसे कि घुटन होने लगी है

हुसैन ताज रिज़वी

जब झूट रावियों के क़लम बोलने लगे

हुसैन ताज रिज़वी

किरन किरन के दरख़्शंदा बाब मेरे हैं

हुसैन सहर

मैदान

हुसैन आबिद

हर्कुलेस और पाटे-ख़ान की सर्कस

हुसैन आबिद

राहत ओ रंज से जुदा हो कर

हुसैन आबिद

ख़यालों ख़यालों में किस पार उतरे

हुसैन आबिद

वो दिल जो था किसी के ग़म का महरम हो गया रुस्वा

हुरमतुल इकराम

उस के सिवा क्या अपनी दौलत

हुरमतुल इकराम

सूरत-ए-सब्ज़ा-ए-बे-गाना चमन से गुज़रे

हुरमतुल इकराम

जैसे कोई ज़िद्दी बच्चा कब बहले बहलाने से

हुमैरा रहमान

इन लफ़्ज़ों में ख़ुद को ढूँडूँगी मैं भी

हुमैरा रहमान

दिल को दरून-ए-ख़्वाब का मौसम बोझल रखता है

हुमैरा रहमान

सुना है ख़्वाब मुकम्मल कभी नहीं होते

हुमैरा राहत

ये कहना था जो दुनिया कह रही है

हुमैरा राहत

वक़्त की आँख से कुछ ख़्वाब नए माँगता है

हुमैरा राहत

तुम्हारे इश्क़ पे दिल को जो मान था न रहा

हुमैरा राहत

मिसाल-ए-ख़ाक कहीं पर बिखर के देखते हैं

हुमैरा राहत

कहानी को मुकम्मल जो करे वो बाब उठा लाई

हुमैरा राहत

हवा के साथ ये कैसा मोआमला हुआ है

हुमैरा राहत

हर एक ख़्वाब की ताबीर थोड़ी होती है

हुमैरा राहत

फ़साना अब कोई अंजाम पाना चाहता है

हुमैरा राहत

आँखों से किसी ख़्वाब को बाहर नहीं देखा

हुमैरा राहत

यादें चलें ख़याल चला अश्क-ए-तर चले

होश तिर्मिज़ी