ख्वाब Poetry (page 12)

इस से पहले कि ज़मीं-ज़ाद शरारत कर जाएँ

इदरीस बाबर

गुल-ए-सुख़न से अँधेरों में ताब-कारी कर

इदरीस बाबर

एक दिन ख़्वाब-नगर जाना है

इदरीस बाबर

दोस्त कुछ और भी हैं तेरे अलावा मिरे दोस्त

इदरीस बाबर

दिल में है इत्तिफ़ाक़ से दश्त भी घर के साथ साथ

इदरीस बाबर

दिल कोई आईना नहीं टूट के रह गया तो फिर

इदरीस बाबर

देखा नहीं चाँद ने पलट कर

इदरीस बाबर

देख न इस तरह गुज़ार अर्सा-ए-चश्म से मुझे

इदरीस बाबर

अब मसाफ़त में तो आराम नहीं आ सकता

इदरीस बाबर

अपने एहसानों का नीला साएबाँ रहने दिया

इबरत मछलीशहरी

ख़याल-ए-बद से हमा-वक़्त इज्तिनाब करो

इबरत बहराईची

उस की इक दुनिया हूँ मैं और मेरी इक दुनिया है वो

इब्राहीम अश्क

रू-ब-रू उन के कोई हर्फ़ अदा क्या करते

इब्राहीम अश्क

न कू-ए-यार में ठहरा न अंजुमन में रहा

इब्राहीम अश्क

मैं कब रहीन-ए-रेग-ए-बयाबान-ए-यास था

इब्राहीम अश्क

लबों पर प्यास हो तो आस के बादल भरे रखियो

इब्राहीम अश्क

करें सलाम उसे तो कोई जवाब न दे

इब्राहीम अश्क

दुनिया लुटी तो दूर से तकता ही रह गया

इब्राहीम अश्क

करता हूँ एक ख़्वाब के मुबहम नुक़ूश याद

इब्राहीम होश

लब-ओ-रुख़्सार ओ जबीं से मिलिए

इब्न-ए-सफ़ी

कैसा जादू है समझ आता नहीं

इब्न-ए-मुफ़्ती

वो ख़्वाब जैसा था गोया सराब लगता था

इब्न-ए-मुफ़्ती

फिर से वो लौट कर नहीं आया

इब्न-ए-मुफ़्ती

हम से मिलते थे सितारे आप के

इब्न-ए-मुफ़्ती

दिल वही अश्क-बार रहता है

इब्न-ए-मुफ़्ती

ये बच्चा किस का बच्चा है

इब्न-ए-इंशा

कल हम ने सपना देखा है

इब्न-ए-इंशा

दिल-आशोब

इब्न-ए-इंशा

चाँद के तमन्नाई

इब्न-ए-इंशा

ऐ मिरे सोच-नगर की रानी

इब्न-ए-इंशा