ख्वाब Poetry (page 10)
पस च-बायद-कर्द
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मोहब्बत की एक नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मिरा ज़ेहन मुझ को रहा करे
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कुछ देर पहले नींद से
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कूच
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक उदास शाम के नाम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक ख़्वाब की दूरी पर
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक कहानी बहुत पुरानी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
चक-फेरी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बन-बास
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बैलन्स-शीट
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बदन-दरीदा रूहों के नाम एक नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
और हवा चुप रही
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ज़रा सी देर को आए थे ख़्वाब आँखों में
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये क़र्ज़-ए-कज-कुलही कब तलक अदा होगा
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये बस्तियाँ हैं कि मक़्तल दुआ किए जाएँ
इफ़्तिख़ार आरिफ़
वफ़ा की ख़ैर मनाता हूँ बेवफ़ाई में भी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
उमीद-ओ-बीम के मेहवर से हट के देखते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
थकन तो अगले सफ़र के लिए बहाना था
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सर-ए-बाम-ए-हिज्र दिया बुझा तो ख़बर हुई
इफ़्तिख़ार आरिफ़
समुंदर इस क़दर शोरीदा-सर क्यूँ लग रहा है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सब चेहरों पर एक ही रंग और सब आँखों में एक ही ख़्वाब
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मुल्क-ए-सुख़न में दर्द की दौलत को क्या हुआ
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मिरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कुछ भी नहीं कहीं नहीं ख़्वाब के इख़्तियार में
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कोई मुज़्दा न बशारत न दुआ चाहती है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कोई जुनूँ कोई सौदा न सर में रक्खा जाए
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ख़्वाब-ए-देरीना से रुख़्सत का सबब पूछते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ख़्वाब देखने वाली आँखें पत्थर होंगी तब सोचेंगे
इफ़्तिख़ार आरिफ़