ख्वाब Poetry (page 8)

दम-ए-मर्ग बालीं पर आया तो होता

इमदाद अली बहर

बुतो ख़ुदा पे न रक्खो मोआ'मला दिल का

इमदाद अली बहर

बग़ैर यार गवारा नहीं कबाब शराब

इमदाद अली बहर

ख़्वाब ही में नज़र आ जाए शब-ए-हिज्र कहीं

इमाम बख़्श नासिख़

सब हमारे लिए ज़ंजीर लिए फिरते हैं

इमाम बख़्श नासिख़

रिफ़अत कभी किसी की गवारा यहाँ नहीं

इमाम बख़्श नासिख़

मिरा सीना है मशरिक़ आफ़्ताब-ए-दाग़-ए-हिज्राँ का

इमाम बख़्श नासिख़

है मोहब्बत सब को उस के अबरू-ए-ख़मदार की

इमाम बख़्श नासिख़

है दिल-ए-सोज़ाँ में तूर उस की तजल्ली-गाह का

इमाम बख़्श नासिख़

चैन दुनिया में ज़मीं से ता-फ़लक दम भर नहीं

इमाम बख़्श नासिख़

आ गया जब से नज़र वो शोख़ हरजाई मुझे

इमाम बख़्श नासिख़

राखी बंधन

इमाम अाज़म

टिमटिमाता हुआ मंदिर का दिया हो जैसे

इमाम अाज़म

क़द बढ़ाने के लिए बौनों की बस्ती में चलो

इमाम अाज़म

वक़्त वक़्त की बात है या दस्तूर है दुनिया का साईं

इलियास इश्क़ी

'इश्क़ी'-साहिब लिखना है तो कोई नई तहरीर लिखो

इलियास इश्क़ी

शत्तुल-अरब

इलियास बाबर आवान

पागल

इलियास बाबर आवान

ख़्वाजा-सरा

इलियास बाबर आवान

ग़ैर-निसाबी तारीख़

इलियास बाबर आवान

आदमी

इलियास बाबर आवान

न-जाने कौन तिरे काख़-ओ-कू में आएगा

इलियास बाबर आवान

मेरा और फूलों का रिश्ता टूट गया

इलियास बाबर आवान

अपना अपना दुख बतलाना होता है

इलियास बाबर आवान

और ही कहीं ठहरे और ही कहीं पहुँचे

इकराम मुजीब

पहले तो आती थीं ईदें भी तुम्हारे आए

इकराम आज़म

पहनाई

इज्तिबा रिज़वी

दिल है और ख़ुद नगरी ज़ौक़-ए-दुआ जिस को कहें

इज्तिबा रिज़वी

जुज़ क़ुर्बत-ए-जाँ पर्दा-ए-जाँ कोई नहीं था

इफ्तिखार शफ़ी

वो कहते हैं कि 'राग़िब' तुम नहीं रखते ख़याल अपना

इफ़्तिख़ार राग़िब