ख्वाब Poetry (page 84)
एक कहानी
अम्बरीन सलाहुद्दीन
क्यूँ अम्बर की पहनाई में चुप की राह टटोलें
अम्बरीन सलाहुद्दीन
कोई एहसास मुकम्मल नहीं रहने देता
अम्बरीन सलाहुद्दीन
जब मिरे शहर की हर शाम ने देखा उस को
अम्बरीन सलाहुद्दीन
हम सितारों में तिरा अक्स ना ढलने देंगे
अम्बरीन सलाहुद्दीन
चाँद उभरेगा तो फिर हश्र दिखाई देगा
अम्बरीन सलाहुद्दीन
बहुत बे-ज़ार होती जा रही हूँ
अम्बरीन सलाहुद्दीन
असीर-ए-ख़्वाब नई जुस्तुजू के दर खोलें
अम्बरीन सलाहुद्दीन
शब थी बे-ख़्वाब इक आरज़ू देर तक
अंबरीन हसीब अंबर
मैं उसे देख रही हूँ बड़ी हैरानी से
अंबरीन हसीब अंबर
कब मौसम-ए-बहार पुकारा नहीं किया
अंबरीन हसीब अंबर
जिस्म-ओ-जाँ में दर आई इस क़दर अज़िय्यत क्यूँ
अंबरीन हसीब अंबर
दिल जिन को ढूँढता है न-जाने कहाँ गए
अंबरीन हसीब अंबर
अब असीरी की ये तदबीर हुई जाती है
अंबरीन हसीब अंबर
साएबाँ क्या अब्र का टुकड़ा है क्या
अम्बर शमीम
ज़माने-भर से जुदा और बा-कमाल कोई
अम्बर खरबंदा
हम ख़्वाब-ज़दा
अम्बर बहराईची
शब ख़्वाब के जज़ीरों में हँस कर गुज़र गई
अम्बर बहराईची
गुलाब था न कँवल फिर बदन वो कैसा था
अम्बर बहराईची
किसे ख़याल कि इशरत के बाब कितने हैं
अमर सिंह फ़िगार
जोश-ए-तकमील-ए-तमन्ना है ख़ुदा ख़ैर करे
अमर सिंह फ़िगार
रवाँ दवाँ नहीं याँ अश्क चश्म-ए-तर की तरह
अमानत लखनवी
गिर पड़े दाँत हुए मू-ए-सर ऐ यार सफ़ेद
अमानत लखनवी
सबा की बात सुनें फूल से कलाम करें
अल्ताफ़ परवाज़
दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नशात-ए-उमीद
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हुब्ब-ए-वतन
अल्ताफ़ हुसैन हाली
जुनूँ कार-फ़रमा हुआ चाहता है
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हक़ीक़त महरम-ए-असरार से पूछ
अल्ताफ़ हुसैन हाली
दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा
अल्ताफ़ हुसैन हाली