ख्वाब Poetry (page 82)

आँखों से इक ख़्वाब गुज़रने वाला है

अमजद इस्लाम अमजद

जगमगा उट्ठा है रंग मंच

अमित गुप्ता

करो न देर जहाँ में जहाँ से आगे चलो

अमीरुल्लाह तस्लीम

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

अमीरुल्लाह तस्लीम

चारासाज़-ए-ज़ख़्म-ए-दिल वक़्त-ए-रफ़ू रोने लगा

अमीरुल्लाह तस्लीम

ख़्वाब जो बिखर गए

आमिर उस्मानी

हक़ीर ख़ाक के ज़र्रे थे आसमान हुए

आमिर उस्मानी

तअ'ल्लुक़ात के सारे दिए बुझे हुए थे

आमिर नज़र

नुक़्ता-ए-बे-नूर ने मिनहाज-ए-इम्काँ कर दिया

आमिर नज़र

लम्स-ए-यक़ीन अपना कहाँ पेश-ओ-पस में था

आमिर नज़र

जबीं को चैन कहाँ ज़ेर-ए-लब दुआ है बस

आमिर नज़र

हमारे चेहरों में पिन्हाँ हैं ज़ाविए क्या क्या

आमिर नज़र

फ़िशार-ए-तीरह-शबी से सहर निकल आए

आमिर नज़र

चश्म-ए-बे-कैफ़ में कारिंदा-ए-मंज़र न रहा

आमिर नज़र

तिरे ख़याल के जब शामियाने लगते हैं

अमीर हम्ज़ा साक़िब

न तो बे-करानी-ए-दिल रही न तो मद्द-ओ-जज़्र-ए-तलब रहा

अमीर हम्ज़ा साक़िब

ख़याल-ए-यार का सिक्का उछालने में गया

अमीर हम्ज़ा साक़िब

वफ़ा की शान वो लेकिन कभी मिरे न हुए

अमीता परसुराम 'मीता'

शिद्दत-ए-शौक़ से अफ़्साने तो हो जाते हैं

अमीता परसुराम 'मीता'

कम्बख़्त दिल ने इश्क़ को वहशत बना दिया

अमीता परसुराम 'मीता'

कोई ले ज़ोर की चुटकी तो है इंकार पोशीदा

अमीरुल इस्लाम हाशमी

इतना बेदारियों से काम न लो

अमीर क़ज़लबाश

वो सर-फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे

अमीर क़ज़लबाश

नदी के पार उजाला दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

मेरी पहचान है क्या मेरा पता दे मुझ को

अमीर क़ज़लबाश

क्या ख़रीदोगे चार आने में

अमीर क़ज़लबाश

ख़ौफ़ बन कर ये ख़याल आता है अक्सर मुझ को

अमीर क़ज़लबाश

जाने ये किस की बनाई हुई तस्वीरें हैं

अमीर क़ज़लबाश

हर एक हाथ में पत्थर दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

हाँ ये तौफ़ीक़ कभी मुझ को ख़ुदा देता था

अमीर क़ज़लबाश