ख्वाब Poetry (page 83)

इक परिंदा अभी उड़ान में है

अमीर क़ज़लबाश

आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह

अमीर क़ज़लबाश

रहा ख़्वाब में उन से शब भर विसाल

अमीर मीनाई

ख़्वाब में आँखें जो तलवों से मलीं

अमीर मीनाई

अच्छे ईसा हो मरीज़ों का ख़याल अच्छा है

अमीर मीनाई

या-रब शब-ए-विसाल ये कैसा गजर बजा

अमीर मीनाई

वस्ल की शब भी ख़फ़ा वो बुत-ए-मग़रूर रहा

अमीर मीनाई

कहा जो मैं ने कि यूसुफ़ को ये हिजाब न था

अमीर मीनाई

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

हम जो मस्त-ए-शराब होते हैं

अमीर मीनाई

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी

अमीर मीनाई

गुज़र को है बहुत औक़ात थोड़ी

अमीर मीनाई

अमीर लाख इधर से उधर ज़माना हुआ

अमीर मीनाई

अच्छे ईसा हो मरीज़ों का ख़याल अच्छा है

अमीर मीनाई

हर एक शाम का मंज़र धुआँ उगलने लगा

अमीर इमाम

तिरा ख़याल था लफ़्ज़ों में ढल गया कैसे

अमीर अहमद ख़ुसरव

तुम और हम

अमीक़ हनफ़ी

तशन्नुज

अमीक़ हनफ़ी

यूँ हुआ है चाक मल्बूस-ए-यक़ीं सिलता नहीं

अमीक़ हनफ़ी

हम कि जो बैठे हुए हैं अपने सर पकड़े हुए

अमीक़ हनफ़ी

हमीं थे जान-ए-बहाराँ हमीं थे रंग-ए-तरब

अमीन राहत चुग़ताई

आज वो फूल बना हुस्न-ए-दिल-आरा देखा

अमीन राहत चुग़ताई

नुमूद-ए-रंग-ओ-बू ने मार डाला

अमीन हज़ीं

रख दिया मैं ने दर-ए-हुस्न पे हारा हुआ इश्क़

अमीन अडीराई

ज़माना गुज़रा हवा फिर से याद आने लगा

अम्बर वसीम इलाहाबादी

वहशत

अम्बरीन सलाहुद्दीन

सर-ए-मिज़्गाँ

अम्बरीन सलाहुद्दीन

'क़ुर्रतुल-ऐन-हैदर'

अम्बरीन सलाहुद्दीन

खिड़की

अम्बरीन सलाहुद्दीन

इंतिसाब

अम्बरीन सलाहुद्दीन