Friendship Poetry (page 36)
उजड़े नगर में शाम कभी कर लिया करें
फ़ारूक़ शफ़क़
घर की चीज़ों से यूँ आश्ना कौन है
फ़ारूक़ शफ़क़
तेज़ाब, आकार ख़ुश्बू का
फ़ारूक़ नाज़की
मौत
फ़ारूक़ नाज़की
मातम-ए-नीम-ए-शब
फ़ारूक़ नाज़की
तोहमत-ए-सैर-ए-चमन हम पे लगी क्या न हुआ
फ़ारूक़ नाज़की
रंग ख़ाके में नया भर दूँगा मैं
फ़ारूक़ नाज़की
बस्ती से दूर जा के कोई रो रहा है क्यूँ
फ़ारूक़ नाज़की
नक़्श आख़िर आप अपना हादिसा हो जाएगा
फ़ारूक़ मुज़्तर
ख़ुशी से फूलें न अहल-ए-सहरा अभी कहाँ से बहार आई
फ़ारूक़ बाँसपारी
दिल-ए-ईज़ा-तलब ले तेरा कहना कर लिया मैं ने
फ़ारूक़ बाँसपारी
ब-रोज़-ए-हश्र मिरे साथ दिल-लगी ही तो है
फ़ारूक़ बाँसपारी
वो चाँद-चेहरा सी एक लड़की
फ़ारूक़ बख़्शी
शिकायत
फ़ारूक़ बख़्शी
शहर-ए-दोस्त
फ़ारूक़ बख़्शी
वो ख़ुद अपना दामन बढ़ाने लगे
फ़ारूक़ बख़्शी
जैसी ख़्वाहिश होती हे कब होता हे
फ़ारूक़ बख़्शी
यारों को क्या ढूँड रहे हो वक़्त की आँख-मिचोली में
फ़ारूक़ अंजुम
शहर की फ़सीलों पर ज़ख़्म जगमगाएँगे
फ़ारूक़ अंजुम
दिल नहीं मिलने का फिर मेरा सितमगर टूट कर
फ़रोग़ हैदराबादी
तुम मिरी वहशतों के साथी थे
फरीहा नक़वी
लाख दिल ने पुकारना चाहा
फरीहा नक़वी
क्यूँ दिया था? बता! मेरी वीरानियों में सहारा मुझे
फरीहा नक़वी
इसे भी छोड़ूँ उसे भी छोड़ूँ तुम्हें सभी से ही मसअला है?
फरीहा नक़वी
क्या अदू क्या दोस्त सब को भा गईं रुस्वाइयाँ
फ़ारिग़ बुख़ारी
देखे कोई जो चाक-ए-गरेबाँ के पार भी
फ़ारिग़ बुख़ारी
अल्फ़ाज़ न आवाज़ न हमराज़ न दम-साज़
फ़रहत ज़ाहिद
औरत हूँ मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हूँ
फ़रहत ज़ाहिद
शाम कहती है कोई बात जुदा सी लिक्खूँ
फ़रहत शहज़ाद
सौत क्या शय है ख़ामुशी क्या है
फ़रहत शहज़ाद