Friendship Poetry (page 37)
शुऊर-ओ-फ़िक्र की तज्दीद का गुमाँ तो हुआ
फ़रहत क़ादरी
राज़ उबल पड़े आख़िर आसमाँ के सीनों से
फ़रहत क़ादरी
जब हर नज़र हो ख़ुद ही तजल्ली-नुमा-ए-ग़म
फ़रहत क़ादरी
जो कुछ भी है नज़र में सो वहम-ए-नुमूद है
फ़रहत कानपुरी
इक ख़लिश सी है मुझे तक़दीर से
फ़रहत कानपुरी
सर सलामत लिए लौट आए गली से उस की
फ़रहत एहसास
मैं जब कभी उस से पूछता हूँ कि यार मरहम कहाँ है मेरा
फ़रहत एहसास
तराना-ए-रेख़्ता
फ़रहत एहसास
तहरीर की फ़ुर्सत
फ़रहत एहसास
साँप
फ़रहत एहसास
ज़मीं ने लफ़्ज़ उगाया नहीं बहुत दिन से
फ़रहत एहसास
ये सारे ख़ूबसूरत जिस्म अभी मर जाने वाले हैं
फ़रहत एहसास
ये बाग़ ज़िंदा रहे ये बहार ज़िंदा रहे
फ़रहत एहसास
उम्र बे-वज्ह गुज़ारे भी नहीं जा सकते
फ़रहत एहसास
साँसें ना-हमवार मिरी
फ़रहत एहसास
रात बहुत शराब पी रात बहुत पढ़ी नमाज़
फ़रहत एहसास
क्या बैठ जाएँ आन के नज़दीक आप के
फ़रहत एहसास
कुछ बताता नहीं क्या सानेहा कर बैठा है
फ़रहत एहसास
काबा-ए-दिल दिमाग़ का फिर से ग़ुलाम हो गया
फ़रहत एहसास
जिस्म की क़ैद से सब रंग तुम्हारे निकल आए
फ़रहत एहसास
जिस तरह पैदा हुए उस से जुदा पैदा करो
फ़रहत एहसास
जिस को जैसा भी है दरकार उसे वैसा मिल जाए
फ़रहत एहसास
इश्क़ में कितने बुलंद इम्कान हो जाते हैं हम
फ़रहत एहसास
ईमाँ का लुत्फ़ पहलू-ए-तश्कीक में मिला
फ़रहत एहसास
हम को बरा-ए-दुनिया बे-जान कर दिया है
फ़रहत एहसास
इक हवा सा मिरे सीने से मिरा यार गया
फ़रहत एहसास
दिनी हैं सब कोई राती नहीं है
फ़रहत एहसास
दिल ने इमदाद कभी हस्ब-ए-ज़रूरत नहीं दी
फ़रहत एहसास
बीमार हो गया हूँ शिफा-ख़ाना चाहिए
फ़रहत एहसास
बा-मा'नियों से बच के मोहमल की राह पकड़ी
फ़रहत एहसास