Friendship Poetry (page 39)
संग-ए-दर देख के सर याद आया
फ़ानी बदायुनी
क़तरा दरिया-ए-आश्नाई है
फ़ानी बदायुनी
मुझ को मिरे नसीब ने रोज़-ए-अज़ल से क्या दिया
फ़ानी बदायुनी
मोहताज-ए-अजल क्यूँ है ख़ुद अपनी क़ज़ा हो जा
फ़ानी बदायुनी
मेरे लब पर कोई दुआ ही नहीं
फ़ानी बदायुनी
लुत्फ़ ओ करम के पुतले हो अब क़हर ओ सितम का नाम नहीं
फ़ानी बदायुनी
क्यूँ न नैरंग-ए-जुनूँ पर कोई क़ुर्बां हो जाए
फ़ानी बदायुनी
कुछ बस ही न था वर्ना ये इल्ज़ाम न लेते
फ़ानी बदायुनी
कूचा-ए-जानाँ में जा निकले जो ग़िल्माँ भूल कर
फ़ानी बदायुनी
किसी के एक इशारे में किस को क्या न मिला
फ़ानी बदायुनी
की वफ़ा यार से एक एक जफ़ा के बदले
फ़ानी बदायुनी
ख़ुदा असर से बचाए इस आस्ताने को
फ़ानी बदायुनी
जीने की है उम्मीद न मरने का यक़ीं है
फ़ानी बदायुनी
जज़्ब-ए-दिल जब ब-रू-ए-कार आया
फ़ानी बदायुनी
इश्क़ इश्क़ हो शायद हुस्न में फ़ना हो कर
फ़ानी बदायुनी
इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है
फ़ानी बदायुनी
हर घड़ी इंक़लाब में गुज़री
फ़ानी बदायुनी
दिल की तरफ़ हिजाब-ए-तकल्लुफ़ उठा के देख
फ़ानी बदायुनी
दिल की काया ग़म ने वो पल्टी कि तुझ सा बन गया
फ़ानी बदायुनी
दिल और दिल में याद किसी ख़ुश-ख़िराम की
फ़ानी बदायुनी
दैर में या हरम में गुज़रेगी
फ़ानी बदायुनी
बेदाद के ख़ूगर थे फ़रियाद तो क्या करते
फ़ानी बदायुनी
अपनी जन्नत मुझे दिखला न सका तू वाइज़
फ़ानी बदायुनी
ऐ मौत तुझ पे उम्र-ए-अबद का मदार है
फ़ानी बदायुनी
ऐ बे-ख़ुदी ठहर कि बहुत दिन गुज़र गए
फ़ानी बदायुनी
तरतीब दे रहा था मैं फ़हरिस्त-ए-दुश्मनान
फ़ना निज़ामी कानपुरी
सहता रहा जफ़ा-ए-दोस्त कहता रहा अदा-ए-दोस्त
फ़ना निज़ामी कानपुरी
वो ख़ानुमाँ-ख़राब न क्यूँ दर-ब-दर फिरे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
कोई समझेगा क्या राज़-ए-गुलशन
फ़ना निज़ामी कानपुरी
हुस्न का एक आह ने चेहरा निढाल कर दिया
फ़ना निज़ामी कानपुरी