Friendship Poetry (page 41)

बहुत सा काम तो पहले ही कर लिया मैं ने

फ़ैज़ान हाशमी

जब तक मिज़ाज-ए-दोस्त में कुछ बरहमी रही

फ़ैज़ुल हसन

हम ने सहरा को सजाया था गुलिस्ताँ की तरह

फ़ैज़ुल हसन

मामूली बे-कार समझने वाले मुझ से दूर रहें

फ़ैज़ आलम बाबर

ज़ेर-ए-लब है अभी तबस्सुम-ए-दोस्त

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मक़ाम 'फ़ैज़' कोई राह में जचा ही नहीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हदीस-ए-यार के उनवाँ निखरने लगते हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ग़म-ए-जहाँ हो रुख़-ए-यार हो कि दस्त-ए-अदू

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आए तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक शाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये मातम-ए-वक़्त की घड़ी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये किस दयार-ए-अदम में...

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यार अग़्यार हो गए हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वासोख़्त

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम्हारे हुस्न के नाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तौक़-ओ-दार का मौसम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सोचने दो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शाह-राह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शहर-ए-याराँ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

'सज्जाद-ज़हीर' के नाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

रक़ीब से!

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मुलाक़ात मिरी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मिरे हमदम मिरे दोस्त!

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मर्ग-ए-सोज़-ए-मोहब्बत

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मेजर-इसहाक़ की याद में

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ख़ुशा ज़मानत-ए-ग़म

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़