Friendship Poetry (page 43)
रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रह-ए-ख़िज़ाँ में तलाश-ए-बहार करते रहे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न गँवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल-ए-रेज़ा-रेज़ा गँवा दिया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न अब रक़ीब न नासेह न ग़म-गुसार कोई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किए आरज़ू से पैमाँ जो मआल तक न पहुँचे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किसी गुमाँ पे तवक़्क़ो' ज़ियादा रखते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी मिटे मिटे से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
जैसे हम-बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इश्क़ मिन्नत-कश-ए-क़रार नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम मुसाफ़िर यूँही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हमीं से अपनी नवा हम-कलाम होती रही
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़म-ब-दिल शुक्र-ब-लब मस्त ओ ग़ज़ल-ख़्वाँ चलिए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तो देखो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फ़िक्र-ए-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूँ या न करूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
उसी से फ़िक्र-ओ-फ़न को हर घड़ी मंसूब रखते हैं
फ़ैय्याज़ रश्क़
ताक़त के सारे ज़ोर को ख़ामोश कर दिया
फ़ैय्याज़ रश्क़
हिमाला की दासियाँ
फ़ैसल सईद फ़ैसल
अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
फ़ैसल अजमी
उस ने देखा जो मुझे आलम-ए-हैरानी में
फ़ैसल अजमी
तेरी आँखें न रहीं आईना-ख़ाना मिरे दोस्त
फ़ैसल अजमी
तिफ़्लाँ की तो कुछ तक़्सीर न थी
फ़हमीदा रियाज़
पछतावा
फ़हमीदा रियाज़
इस गली के मोड़ पर
फ़हमीदा रियाज़
तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं
फ़हमी बदायूनी