Heart Broken Poetry (page 116)
हस्ती इक नक़्श-ए-इनइकासी है
फ़िगार उन्नावी
हासिल-ए-ज़ब्त-ए-फ़ुग़ाँ नाकाम है
फ़िगार उन्नावी
हदीस-ए-सोज़-ओ-साज़-ए-शम्-ओ-परवाना नहीं कहते
फ़िगार उन्नावी
ग़म-ए-जानाँ से रंगीं और कोई ग़म नहीं होता
फ़िगार उन्नावी
चमन अपने रंग में मस्त है कोई ग़म-गुसार-ए-दिगर नहीं
फ़िगार उन्नावी
चला हूँ अपनी मंज़िल की तरफ़ तो शादमाँ हो कर
फ़िगार उन्नावी
आरज़ू हसरत-ए-नाकाम से आगे न बढ़ी
फ़िगार उन्नावी
टलते हैं कोई हाथ चले या ज़बाँ चले
फ़िदवी लाहौरी
टलते हैं कोई हाथ चले या ज़बाँ चले
फ़िदवी लाहौरी
कमरे में आ के बैठ गई धूप मेज़ पर
फ़ज़्ल ताबिश
सफ़र
फ़ज़्ल ताबिश
मौत माँ की तरह साथ है
फ़ज़्ल ताबिश
एक नज़्म
फ़ज़्ल ताबिश
एक नज़्म
फ़ज़्ल ताबिश
आ के हो जा बे-लिबास
फ़ज़्ल ताबिश
ये सन्नाटा बहुत महँगा पड़ेगा
फ़ज़्ल ताबिश
रातों के ख़ौफ़ दिन की उदासी ने क्या दिया
फ़ज़्ल ताबिश
मिलों के शहर में घटता हुआ दिन सोचता होगा
फ़ज़्ल ताबिश
कली कली का बदन फोड़ कर जो निकला है
फ़ज़्ल ताबिश
जिन ख़्वाबों से नींद उड़ जाए ऐसे ख़्वाब सजाए कौन
फ़ज़्ल ताबिश
इन आँखों में बिन बोले भी मादर-ज़ाद तक़ाज़ा है
फ़ज़्ल ताबिश
हर इक दरवाज़ा मुझ पर बंद होता
फ़ज़्ल ताबिश
फ़रेब-ए-करम इक तो उन का है इस पर
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
तुम्हीं इक नहीं जाँ-सेताँ और भी हैं
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
तामीर-ए-नौ क़ज़ा-ओ-क़दर की नज़र में है
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
कुछ तो मुझे महबूब तिरा ग़म भी बहुत है
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
ग़मों से खेलते रहना कोई हँसी भी नहीं
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
बहार आई गुल-अफ़्शानी के दिन हैं
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
अस्बाब-ए-ज़िंदगी की हर इक चीज़ है गराँ
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
अब वो महकी हुई सी रात नहीं
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली