Heart Broken Poetry (page 143)
कोई तसव्वुर में जल्वा-गर है बहार दिल में समा रही है
फ़ैज़ी निज़ाम पुरी
गुलों के चेहरा-ए-रंगीं पे वो निखार नहीं
फ़ैज़ी निज़ाम पुरी
ग़म-ए-जानाँ के सिवा कुछ हमें प्यारा न हुआ
फ़ैज़ी निज़ाम पुरी
रात गहरी है मगर एक सहारा है मुझे
फ़ैज़ी
जो दिल को पहले मयस्सर था क्या हुआ उस का
फ़ैज़ी
जानता हूँ कि कई लोग हैं बेहतर मुझ से
फ़ैज़ी
इस लिए दिल बुरा किया ही नहीं
फ़ैज़ी
अच्छा है तू ने इन दिनों देखा नहीं मुझे
फ़ैज़ी
मिरे वजूद को मौजूदगी दिखाती थी
फ़ैज़ान हाशमी
इसी जहाज़ के सहरा में डूब जाने की
फ़ैज़ान हाशमी
अपने ख़ला में ला कि ये तुम को दिखा रहा हूँ मैं
फ़ैज़ान हाशमी
वो जितने दूर हैं उतने ही मेरे पास भी हैं
फ़ैज़ुल हसन
सुब्ह-ए-नौ लाती है हर शाम तुम्हें क्या मा'लूम
फ़ैज़ुल हसन
लोग कहते हैं कि क़ातिल को मसीहा कहिए
फ़ैज़ुल हसन
काँच के शहर में पत्थर न उठाओ यारो
फ़ैज़ुल हसन
जब तक मिज़ाज-ए-दोस्त में कुछ बरहमी रही
फ़ैज़ुल हसन
जाने क्या सोच के उस ने सितम ईजाद किया
फ़ैज़ुल हसन
हम ने सहरा को सजाया था गुलिस्ताँ की तरह
फ़ैज़ुल हसन
एक मुद्दत से सर-ए-बाम वो आया भी नहीं
फ़ैज़ुल हसन
दिल जिस का दर्द-ए-इश्क़ का हामिल नहीं रहा
फ़ैज़ुल हसन
ऐ दिल अच्छा नहीं मसरूफ़-ए-फ़ुग़ाँ हो जाना
फ़ैज़ुल हसन
तमाम हुस्न-ओ-मआ'नी का रंग उड़ने लगा
फ़ैज़ ख़लीलाबादी
सुराही मुज़्महिल है मय का पियाला थक चुका है
फ़ैज़ ख़लीलाबादी
लोग कहते हैं बहुत हम ने कमाई दुनिया
फ़ैज़ ख़लीलाबादी
दिन उतरते ही नई शाम पहन लेता हूँ
फ़ैज़ ख़लीलाबादी
कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे
फ़ैज़ अनवर
लाख बहकाए ये दुनिया हो गया तो हो गया
फ़ैज़ आलम बाबर
ज़ेर-ए-लब है अभी तबस्सुम-ए-दोस्त
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़