Heart Broken Poetry (page 144)

शैख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

नहीं शिकायत-ए-हिज्राँ कि इस वसीले से

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मिरी जान आज का ग़म न कर कि न जाने कातिब-ए-वक़्त ने

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जुदा थे हम तो मयस्सर थीं क़ुर्बतें कितनी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जो नफ़स था ख़ार-ए-गुलू बना जो उठे थे हाथ लहू हुए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जब तुझे याद कर लिया सुब्ह महक महक उठी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हाँ नुक्ता-वरो लाओ लब-ओ-दिल की गवाही

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक सुब्ह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये मातम-ए-वक़्त की घड़ी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ये किस दयार-ए-अदम में...

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यास

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यहाँ से शहर को देखो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

याद

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

व-यबक़ा-वज्ह-ओ-रब्बिक

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वासोख़्त

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उम्मीद-ए-सहर की बात सुनो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

टूटी जहाँ जहाँ पे कमंद

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम्हारे हुस्न के नाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम ये कहते हो अब कोई चारा नहीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम ही कहो क्या करना है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम अपनी करनी कर गुज़रो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तीन मंज़र

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़