Heart Broken Poetry (page 279)

ख़ामोशी का शहर

अनीस नागी

एक नज़्म

अनीस नागी

एक नज़्म

अनीस नागी

एक नज़्म

अनीस नागी

ये ख़ाना हमेशा से वीरान है

अनीस अशफ़ाक़

रू-ए-गुल चेहरा-ए-महताब नहीं देखते हैं

अनीस अशफ़ाक़

म'अरका जब छिड़ गया तो क्या हुआ हम से सुनो

अनीस अशफ़ाक़

इसी ज़मीं पे इसी आसमाँ में रहना है

अनीस अशफ़ाक़

हमेशा किसी इम्तिहाँ में रहा

अनीस अशफ़ाक़

पथरीली सी शाम में तुम ने ऐसे याद किया जानम

अनीस अंसारी

नाम तेरा भी रहेगा न सितमगर बाक़ी

अनीस अंसारी

मुझ पे हर ज़ुल्म रवा रख कि मैं जो हूँ सो हूँ

अनीस अंसारी

मिरा हर तीर निशाने पे न पहुँचा आख़िर

अनीस अंसारी

जहाँ दर था वहाँ दीवार क्यूँ है

अनीस अंसारी

इस शहर के लोग अजीब से हैं अब सब ही तुम्हारे असीर हुए

अनीस अंसारी

दिल पर यूँही चोट लगी तो कुछ दिन ख़ूब मलाल किया

अनीस अंसारी

भर नहीं पाया अभी तक ज़ख़्म-ए-कारी हाए हाए

अनीस अंसारी

बड़ा आज़ार-ए-जाँ है वो अगरचे मेहरबाँ है वो

अनीस अंसारी

तिरे गेसुओं के साए में जो एक पल रहा हूँ

अनीस अहमद अनीस

शीशा ही चाहिए न मय-ए-अर्ग़वाँ मुझे

अनीस अहमद अनीस

नज़र मिलते ही साक़ी से गिरी इक बर्क़ सी दिल पर

अनीस अहमद अनीस

जो आईने से तेरी जल्वा-सामानी नहीं जाती

अनीस अहमद अनीस

फ़िराक़-ए-यार में कुछ कहिए समझाया नहीं जाता

अनीस अहमद अनीस

चलो ये सच ही सही होगा ना-गहाँ गुज़रे

अनीस अहमद अनीस

अब ग़म का कोई ग़म न ख़ुशी की ख़ुशी मुझे

अनीस अहमद अनीस

उफ़ वो तूफ़ान-ए-शबाब आह वो सीना तेरा

अंदलीब शादानी

जिगर में टीस लब हँसने पे मजबूर

अंदलीब शादानी

दिल पर चोट पड़ी है तब तो आह लबों तक आई है

अंदलीब शादानी

मुझे इल्ज़ाम न दे तर्क-ए-शकेबाई का

अंदलीब शादानी

क्या कहिए रू-ए-हुस्न पे आलम नक़ाब का

अंदलीब शादानी