Heart Broken Poetry (page 277)
यहाँ जो ज़ख़्म मिलते हैं वो सिलते हैं यहीं मेरे
अंजुम ख़लीक़
सितमगरों से डरूँ चुप रहूँ निबाह करूँ
अंजुम ख़लीक़
सदाक़तों को ये ज़िद है ज़बाँ तलाश करूँ
अंजुम ख़लीक़
कितना ढूँडा उसे जब एक ग़ज़ल और कही
अंजुम ख़लीक़
ख़ाक का रिज़्क़ यहाँ हर कस-ओ-ना-कस निकला
अंजुम ख़लीक़
कार-ए-हुनर सँवारने वालों में आएगा
अंजुम ख़लीक़
कहाँ तक और इस दुनिया से डरते ही चले जाना
अंजुम ख़लीक़
जहाँ सीनों में दिल शानों पे सर आबाद होते हैं
अंजुम ख़लीक़
हम अपने ज़ौक़-ए-सफ़र को सफ़र सितारा करें
अंजुम ख़लीक़
हर शे'र से मेरे तिरा पैकर निकल आए
अंजुम ख़लीक़
चाहे तू शौक़ से मुझे वहशत-ए-दिल शिकार कर
अंजुम ख़लीक़
बीते हुए लम्हात को पहचान में रखना
अंजुम ख़लीक़
बदल चुके हैं सब अगली रिवायतों के निसाब
अंजुम ख़लीक़
अब शहर में अक़दार-कुशी एक हुनर है
अंजुम ख़लीक़
याद है क़िस्सा-ए-ग़म का मुझे हर लफ़्ज़ अभी
अंजुम इरफ़ानी
सफ़र में हर क़दम रह रह के ये तकलीफ़ ही देते
अंजुम इरफ़ानी
कोई पुराना ख़त कुछ भूली-बिसरी याद
अंजुम इरफ़ानी
ये रात ढलते ढलते रख गई जवाब के लिए
अंजुम इरफ़ानी
तेशा-ब-कफ़ को आइना-गर कह दिया गया
अंजुम इरफ़ानी
रक़्स-ए-जुनूँ की गर्मी-ए-तासीर देखना
अंजुम इरफ़ानी
लहजे का रस हँसी की धनक छोड़ कर गया
अंजुम इरफ़ानी
जो न हों कुछ तशरीह-तलब कम होते हैं
अंजुम इरफ़ानी
इस ने देखा है सर-ए-बज़्म सितमगर की तरह
अंजुम इरफ़ानी
फ़सील-ए-जिस्म पे शब-ख़ूँ शरारतें तेरी
अंजुम इरफ़ानी
धूप आती नहीं रुख़ अपना बदल कर देखें
अंजुम इरफ़ानी
बड़ी फ़र्ज़-आश्ना है सबा करे ख़ूब काम हिसाब का
अंजुम इरफ़ानी
और कुछ याद नहीं अब से न तब से पूछो
अंजुम इरफ़ानी
अब किसी अंधे सफ़र के लिए तय्यार हुआ चाहता है
अंजुम इरफ़ानी
अब इस सादा कहानी को नया इक मोड़ देना था
अंजुम इरफ़ानी
उस ने मजबूर-ए-वफ़ा जान के मुँह फेर लिया
अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी