Heart Broken Poetry (page 275)
मैं जब वजूद से होते हुए गुज़रता हूँ
अंजुम सलीमी
ख़ुद अपने हाथ से क्या क्या हुआ नहीं मिरे साथ
अंजुम सलीमी
ख़ाक छानी न किसी दश्त में वहशत की है
अंजुम सलीमी
कैसी सोहबत है कैसी तन्हाई
अंजुम सलीमी
जस्त भरता हुआ फ़र्दा के दहाने की तरफ़
अंजुम सलीमी
इस से आगे तो बस ला-मकाँ रह गया
अंजुम सलीमी
इन दिनों ख़ुद से फ़राग़त ही फ़राग़त है मुझे
अंजुम सलीमी
इक दूजे को देर से समझा देर से यारी की
अंजुम सलीमी
दिन ले के जाऊँ साथ उसे शाम कर के आऊँ
अंजुम सलीमी
चराग़ हाथ में हो तो हवा मुसीबत है
अंजुम सलीमी
मौसम का आह-ओ-नाला से अंदाज़ा कीजिए
अंजुम रूमानी
गुज़र रहे हैं गुज़रने वाले
अंजुम रूमानी
यहाँ तो फिर वही दीवार-ओ-दर निकल आए
अंजुम रूमानी
नहीं नाम-ओ-निशाँ साए का लेकिन यार बैठे हैं
अंजुम रूमानी
मौसम का आह-ओ-नाला से अंदाज़ा कीजिए
अंजुम रूमानी
जहाँ तक गया कारवान-ए-ख़याल
अंजुम रूमानी
जाए ख़िरद नहीं है कि फ़रज़ाना चाहिए
अंजुम रूमानी
जब भी कोई बात की आँसू ढलके साथ
अंजुम रूमानी
हर चंद उन्हें अहद फ़रामोश न होगा
अंजुम रूमानी
है वाक़िआ कुछ और रिवायत कुछ और है
अंजुम रूमानी
है जो तासीर सी फ़ुग़ाँ में अभी
अंजुम रूमानी
तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए
अंजुम रहबर
दफ़ना दिया गया मुझे चाँदी की क़ब्र में
अंजुम रहबर
दफ़ना दिया गया मुझे चाँदी की क़ब्र में
अंजुम रहबर
तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए
अंजुम रहबर
मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था
अंजुम रहबर
आग बहते हुए पानी में लगाने आई
अंजुम रहबर
ज़िंदगी अपनी क़रीने से बसर होती नहीं
अंजुम नियाज़ी
मिरी आवाज़ सुन कर ज़िंदगी बेदार हो जैसे
अंजुम नियाज़ी
किस ने दी मुझ को सदा कौन-ओ-मकाँ के उस तरफ़
अंजुम नियाज़ी