Hope Poetry (page 166)

मस्जिद

अख़्तर-उल-ईमान

काले सफ़ेद परों वाला परिंदा और मेरी एक शाम

अख़्तर-उल-ईमान

एक लड़का

अख़्तर-उल-ईमान

एक एहसास

अख़्तर-उल-ईमान

दूर की आवाज़

अख़्तर-उल-ईमान

डासना स्टेशन का मुसाफ़िर

अख़्तर-उल-ईमान

बे-चारगी

अख़्तर-उल-ईमान

बाज़-आमद --- एक मुन्ताज

अख़्तर-उल-ईमान

अपाहिज गाड़ी का आदमी

अख़्तर-उल-ईमान

आख़िरी मुलाक़ात

अख़्तर-उल-ईमान

दफ़अतन आँधियों ने रुख़ बदला

अख़्तर ज़ियाई

फिर वही शब के सराबों का चलन!

अख़्तर ज़ियाई

ग़म का आहंग है

अख़्तर ज़ियाई

इरफ़ान-ओ-आगही के सज़ा-वार हम हुए

अख़्तर ज़ियाई

दिन ढला शब हुई चराग़ जले

अख़्तर ज़ियाई

अहद-ए-वफ़ा का क़र्ज़ अदा कर दिया गया

अख़्तर ज़ियाई

आँख दरिया जिगर लहू करना

अख़्तर ज़ियाई

शश-जिहत

अख़्तर उस्मान

नए सुर की तमसील

अख़्तर उस्मान

बुत-साज़

अख़्तर उस्मान

वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता

अख्तर शुमार

लरज़ उठा है मिरे दिल में क्यूँ न जाने दिया

अख्तर शुमार

ख़्वाहिश-ए-जादा-ए-राहत से निकलता कैसे

अख्तर शुमार

उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ

अख़्तर शीरानी

उस के अहद-ए-शबाब में जीना

अख़्तर शीरानी

मुझे है ए'तिबार-ए-वादा लेकिन

अख़्तर शीरानी

इश्क़ को नग़्मा-ए-उम्मीद सुना दे आ कर

अख़्तर शीरानी

ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना

अख़्तर शीरानी

चमन में रहने वालों से तो हम सहरा-नशीं अच्छे

अख़्तर शीरानी

आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या

अख़्तर शीरानी