Hope Poetry (page 168)

बजा कि है पास-ए-हश्र हम को करेंगे पास-ए-शबाब पहले

अख़्तर शीरानी

ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए

अख़्तर शीरानी

अगर वो अपने हसीन चेहरे को भूल कर बे-नक़ाब कर दे

अख़्तर शीरानी

आश्ना हो कर तग़ाफ़ुल आश्ना क्यूँ हो गए

अख़्तर शीरानी

आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या

अख़्तर शीरानी

यारान-ए-तेज़-गाम से रंजिश कहाँ है अब

अख़तर शाहजहाँपुरी

वक़्त बे-रहम है मक़्तल की ज़मीनों जैसा

अख़तर शाहजहाँपुरी

राह-ए-वफ़ा में कोई हमें जानता न था

अख़तर शाहजहाँपुरी

क़िस्मत में दर्द है तो दवा ही न लाऊँगा

अख़तर शाहजहाँपुरी

कहाँ से लाएँगे आँसू अज़ा-दारी के मौसम में

अख़तर शाहजहाँपुरी

जो पलकों पर मिरी ठहरा हुआ है

अख़तर शाहजहाँपुरी

जो फ़क़त शोख़ी-ए-तहरीर भी हो सकती है

अख़तर शाहजहाँपुरी

जब मुख़ालिफ़ मिरा राज़-दाँ हो गया

अख़तर शाहजहाँपुरी

हाथ जब मौसम के गीले हो गए हैं

अख़तर शाहजहाँपुरी

इक उम्र भटकते रहे घर ही नहीं आया

अख़तर शाहजहाँपुरी

अगर बुलंदी का मेरी वो ए'तिराफ़ करे

अख़तर शाहजहाँपुरी

इक अजब आलम है दिल का ज़िंदगी की राह में

अख्तर सईदी

निगाहें मुंतज़िर हैं किस की दिल को जुस्तुजू क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

मुझे अब देखती है ज़िंदगी यूँ बे-नियाज़ाना

अख़्तर सईद ख़ान

किस जुर्म-ए-आरज़ू की सज़ा है ये ज़िंदगी

अख़्तर सईद ख़ान

चराग़ ले के उसे ढूँडने चला हूँ मैं

अख़्तर सईद ख़ान

बहुत क़रीब रही है ये ज़िंदगी हम से

अख़्तर सईद ख़ान

तुम से छुट कर ज़िंदगी का नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

तिरी जबीं पे मिरी सुब्ह का सितारा है

अख़्तर सईद ख़ान

सुन रहा हूँ बे-सदा नग़्मा जो मैं बा-चश्म-ए-तर

अख़्तर सईद ख़ान

निगाहें मुंतज़िर हैं किस की दिल को जुस्तुजू क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

नैरंगी-ए-नशात-ए-तमन्ना अजीब है

अख़्तर सईद ख़ान

मुद्दत से लापता है ख़ुदा जाने क्या हुआ

अख़्तर सईद ख़ान

मआल-ए-गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार कुछ भी नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

लब-ए-सुकूत पे इक हर्फ़-ए-बे-नवा भी नहीं

अख़्तर सईद ख़ान