Hope Poetry (page 205)

उन को अहद-ए-शबाब में देखा

अब्दुल हमीद अदम

सो के जब वो निगार उठता है

अब्दुल हमीद अदम

साक़ी शराब ला कि तबीअ'त उदास है

अब्दुल हमीद अदम

मतलब मुआ'मलात का कुछ पा गया हूँ मैं

अब्दुल हमीद अदम

मय-कदा था चाँदनी थी मैं न था

अब्दुल हमीद अदम

लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला

अब्दुल हमीद अदम

कितनी बे-साख़्ता ख़ता हूँ मैं

अब्दुल हमीद अदम

ख़ुश हूँ कि ज़िंदगी ने कोई काम कर दिया

अब्दुल हमीद अदम

खुली वो ज़ुल्फ़ तो पहली हसीन रात हुई

अब्दुल हमीद अदम

हम से चुनाँ-चुनीं न करो हम नशे में हैं

अब्दुल हमीद अदम

हम ने हसरतों के दाग़ आँसुओं से धो लिए

अब्दुल हमीद अदम

हसीन नग़्मा-सराओ! बहार के दिन हैं

अब्दुल हमीद अदम

हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया

अब्दुल हमीद अदम

दिल है बड़ी ख़ुशी से इसे पाएमाल कर

अब्दुल हमीद अदम

देख कर दिल-कशी ज़माने की

अब्दुल हमीद अदम

दरोग़ के इम्तिहाँ-कदे में सदा यही कारोबार होगा

अब्दुल हमीद अदम

छेड़ो तो उस हसीन को छेड़ो जो यार हो

अब्दुल हमीद अदम

बस इस क़दर है ख़ुलासा मिरी कहानी का

अब्दुल हमीद अदम

बहुत से लोगों को ग़म ने जिला के मार दिया

अब्दुल हमीद अदम

किसी का क़हर किसी की दुआ मिले तो सही

अब्दुल हमीद

किसी दश्त ओ दर से गुज़रना भी क्या

अब्दुल हमीद

इस से पहले कि हमें अहल-ए-जफ़ा रुस्वा करें

अब्दुल हमीद साक़ी

क्या सहल समझे हो कहीं धब्बा छुटा न हो

अब्दुल हलीम शरर

क्या सहल समझे हो कहीं धब्बा छुटा न हो

अब्दुल हलीम शरर

इस तिलिस्म-ए-रोज़-ओ-शब से तो कभी निकलो ज़रा

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

हर इंसाँ अपने होने की सज़ा है

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

ग़ुबार-ए-दर्द से सारा बदन अटा निकला

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

गर्द-ए-फ़िराक़ ग़ाज़ा कश-ए-आइना न हो

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

दुआ को हाथ मिरा जब कभी उठा होगा

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी

बहार बन के ख़िज़ाँ को न यूँ दिलासा दे

अब्दुल हफ़ीज़ नईमी