Hope Poetry (page 204)

हर आन नई शान है हर लम्हा नया है

अब्दुल मन्नान तरज़ी

अपने हालात का असीर हूँ मैं

अब्दुल मन्नान तरज़ी

आँख पर ए'तिबार हो जाए

अब्दुल मन्नान तरज़ी

ज़िंदगी तुझ से प्यार क्या करते

अब्दुल मन्नान समदी

नज़र की वुसअतों में कुल जहाँ था

अब्दुल मन्नान समदी

बदलते मौसमों में आब-ओ-दाना भी नहीं होगा

अब्दुल मन्नान समदी

तू जो आबाद है ऐ दोस्त मिरे दिल के क़रीब

अब्दुल मलिक सोज़

मुझ से मेरी हयात रूठ गई

अब्दुल मलिक सोज़

आज क्यूँ चुप हैं तेरे सौदाई

अब्दुल मलिक सोज़

हाल-ए-दिल सुन के वो आज़ुर्दा हैं शायद उन को

अब्दुल मजीद सालिक

हाल-ए-दिल सुन के वो आज़ुर्दा हैं शायद उन को

अब्दुल मजीद सालिक

चराग़-ए-ज़िंदगी होगा फ़रोज़ाँ हम नहीं होंगे

अब्दुल मजीद सालिक

वो है हैरत-फ़ज़ा-ए-चश्म-ए-मा'नी सब नज़ारों में

अब्दुल मजीद सालिक

मिरे दिल में है कि पूछूँ कभी मुर्शिद-ए-मुग़ाँ से

अब्दुल मजीद सालिक

ग़म के हाथों मिरे दिल पर जो समाँ गुज़रा है

अब्दुल मजीद सालिक

चराग़-ए-ज़िंदगी होगा फ़रोज़ाँ हम नहीं होंगे

अब्दुल मजीद सालिक

शाम-ए-ग़म और सितारों के सिवा

अब्दुल मजीद भट्टी

वो मिले भी तो इक झिझक सी रही

अब्दुल हमीद अदम

शायद मुझे निकाल के पछता रहे हों आप

अब्दुल हमीद अदम

मुद्दआ दूर तक गया लेकिन

अब्दुल हमीद अदम

मैं और उस ग़ुंचा-दहन की आरज़ू

अब्दुल हमीद अदम

लज़्ज़त-ए-ग़म तो बख़्श दी उस ने

अब्दुल हमीद अदम

हम को शाहों की अदालत से तवक़्क़ो' तो नहीं

अब्दुल हमीद अदम

हर दिल-फ़रेब चीज़ नज़र का ग़ुबार है

अब्दुल हमीद अदम

आँख का ए'तिबार क्या करते

अब्दुल हमीद अदम

ज़ख़्म दिल के अगर सिए होते

अब्दुल हमीद अदम

ये कैसी सरगोशी-ए-अज़ल साज़-ए-दिल के पर्दे हिला रही है

अब्दुल हमीद अदम

वो सूरज इतना नज़दीक आ रहा है

अब्दुल हमीद अदम

वो बातें तिरी वो फ़साने तिरे

अब्दुल हमीद अदम

वो अबरू याद आते हैं वो मिज़्गाँ याद आते हैं

अब्दुल हमीद अदम