Hope Poetry (page 206)

फिर रग-शो'ला-ए-जाँ-सोज़ में नश्तर गुज़रा

अब्दुल हादी वफ़ा

पीरी में शौक़ हौसला-फ़रसा नहीं रहा

अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़

हर बात है 'ख़ालिद' की ज़माने से निराली

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

क़ुर्ब नस नस में आग भरता है

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

क़ज़ा से क़र्ज़ किस मुश्किल से ली उम्र-ए-बक़ा हम ने

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

फूली है शफ़क़ गो कि अभी शाम नहीं है

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

नख़चीर हूँ मैं कश्मकश-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र का

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

मैं बात कौन से पैरा-ए-बयाँ में करूँ

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

हों क्यूँ न मुन्कशिफ़ असरार पस्त-ओ-बाला के

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

ग़ुंचे का जवाब हो गया है

अब्दुल अज़ीज़ फ़ितरत

उस से उम्मीद-ए-वफ़ा ऐ दिल-ए-नाशाद न कर

अब्दुल अलीम आसि

जबीन-ए-शौक़ को कुछ और भी इज़्न-ए-सआदत दे

अब्दुल अलीम आसि

अपनी हस्ती से था ख़ुद मैं बद-गुमाँ कल रात को

अब्दुल अलीम आसि

शायरी तलब अपनी शायरी अता उस की

अब्दुल अहद साज़

मिरी रफ़ीक़-ए-नफ़्स मौत तेरी उम्र दराज़

अब्दुल अहद साज़

पस-ए-तक़रीब-ए-मुलाक़ात

अब्दुल अहद साज़

ना-काम कोशिश

अब्दुल अहद साज़

इंतिज़ार बाक़ी है

अब्दुल अहद साज़

बे-निशाँ होने से पहले

अब्दुल अहद साज़

अलविदा

अब्दुल अहद साज़

आवाज़ के मोती

अब्दुल अहद साज़

आरज़ू

अब्दुल अहद साज़

ज़िक्र हम से बे-तलब का क्या तलबगारी के दिन

अब्दुल अहद साज़

सोच कर भी क्या जाना जान कर भी क्या पाया

अब्दुल अहद साज़

सवाल का जवाब था जवाब के सवाल में

अब्दुल अहद साज़

मिरी निगाहों पे जिस ने शाम ओ सहर की रानाइयाँ लिखी हैं

अब्दुल अहद साज़

मंज़र शमशान हो गया है

अब्दुल अहद साज़

लफ़्ज़ों के सहरा में क्या मा'नी के सराब दिखाना भी

अब्दुल अहद साज़

हम अपने ज़ख़्म कुरेदते हैं वो ज़ख़्म पराए धोते थे

अब्दुल अहद साज़

हसरत-ए-दीद नहीं ज़ौक़-ए-तमाशा भी नहीं

अब्दुल अहद साज़