Hope Poetry (page 21)

क्या कहें क्यूँकर हुआ तूफ़ान में पैदा क़फ़स

हीरा लाल फ़लक देहलवी

दिल शादमाँ हो ख़ुल्द की भी आरज़ू न हो

हीरा लाल फ़लक देहलवी

अश्क-ए-ग़म वो है जो दुनिया को दिखा भी न सकूँ

हीरा लाल फ़लक देहलवी

आरास्ता बज़्म-ए-ऐश हुई अब रिंद पिएँगे खुल खुल के

हीरा लाल फ़लक देहलवी

आह-ए-ज़िंदाँ में जो की चर्ख़ पे आवाज़ गई

हीरा लाल फ़लक देहलवी

उतरने वाली दुखों की बरात से पहले

हज़ीं लुधियानवी

उम्र भर बहते हैं ग़म के तुंद-रौ धारों के साथ

हज़ीं लुधियानवी

इस तरह पैकर-ए-वफ़ा हो जाएँ

हज़ीं लुधियानवी

इस का नहीं है ग़म कोई, जाँ से अगर गुज़र गए

हज़ीं लुधियानवी

इस का नहीं है ग़म कोई जाँ से अगर गुज़र गए

हज़ीं लुधियानवी

हैरान सारा शहर था जिस की उड़ान पर

हज़ीं लुधियानवी

फ़सील-ए-शुक्र में हैं सब्र के हिसार में हैं

हयात वारसी

दास्तान-ए-फ़ितरत है ज़र्फ़ की कहानी है

हयात वारसी

ये इल्तिजा दुआ ये तमन्ना फ़ुज़ूल है

हयात लखनवी

ये जज़्बा-ए-तलब तो मिरा मर न जाएगा

हयात लखनवी

वो बद-दुआ उसे समझे अगर दुआ लिक्खूँ

हयात लखनवी

सिलसिला ख़्वाबों का सब यूँही धरा रह जाएगा

हयात लखनवी

मैं ख़ाल-ओ-ख़द का सरापा तसव्वुरात में था

हयात लखनवी

कई सितारे यहाँ टूटते बिखरते हैं

हयात लखनवी

कब क़ाबिल-ए-तक़लीद है किरदार हमारा

हयात लखनवी

चमन वही है घटाएँ वही बहार वही

हया लखनवी

आह ये बरसात का मौसम ये ज़ख़्मों की बहार

हया लखनवी

शौक़ कहता है कि चलिए कू-ए-जानाँ की तरफ़

हया लखनवी

न होती हाल-ए-दिल कहने की गर हिम्मत तो अच्छा था

हया लखनवी

चमन वही है घटाएँ वही बहार वही

हया लखनवी

काफ़िर-ए-इश्क़ हूँ मुश्ताक़-ए-शहादत भी हूँ

हातिम अली मेहर

ज़ुल्फ़ अंधेर करने वाली है

हातिम अली मेहर

वो ज़ार हूँ कि सर पे गुलिस्ताँ उठा लिया

हातिम अली मेहर

उस ज़ुल्फ़ के सौदे का ख़लल जाए तो अच्छा

हातिम अली मेहर

उस का हाल-ए-कमर खुला हमदम

हातिम अली मेहर