Hope Poetry (page 23)
छुप नहीं सकती छुपाने से मोहब्बत की नज़र
हसरत मोहानी
छेड़ नाहक़ न ऐ नसीम-ए-बहार
हसरत मोहानी
भूल ही जाएँ हम को ये तो न हो
हसरत मोहानी
आरज़ू तेरी बरक़रार रहे
हसरत मोहानी
आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न
हसरत मोहानी
कृष्ण
हसरत मोहानी
याद कर वो दिन कि तेरा कोई सौदाई न था
हसरत मोहानी
उन को रुस्वा मुझे ख़राब न कर
हसरत मोहानी
उन को जो शुग़्ल-ए-नाज़ से फ़ुर्सत न हो सकी
हसरत मोहानी
तुझ से गरवीदा यक ज़माना रहा
हसरत मोहानी
तिरे दर्द से जिस को निस्बत नहीं है
हसरत मोहानी
तासीर-ए-बर्क़-ए-हुस्न जो उन के सुख़न में थी
हसरत मोहानी
सियहकार थे बा-सफ़ा हो गए हम
हसरत मोहानी
सितम हो जाए तम्हीद-ए-करम ऐसा भी होता है
हसरत मोहानी
रविश-ए-हुस्न-ए-मुराआत चली जाती है
हसरत मोहानी
रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम
हसरत मोहानी
क़वी दिल शादमाँ दिल पारसा दिल
हसरत मोहानी
पैरव-ए-मस्लक-ए-तस्लीम-ओ-रज़ा होते हैं
हसरत मोहानी
पैहम दिया प्याला-ए-मय बरमला दिया
हसरत मोहानी
निगाह-ए-यार जिसे आश्ना-ए-राज़ करे
हसरत मोहानी
नज़्ज़ारा-ए-पैहम का सिला मेरे लिए है
हसरत मोहानी
न सूरत कहीं शादमानी की देखी
हसरत मोहानी
न समझे दिल फ़रेब-ए-आरज़ू को
हसरत मोहानी
न सही गर उन्हें ख़याल नहीं
हसरत मोहानी
मुक़र्रर कुछ न कुछ इस में रक़ीबों की भी साज़िश है
हसरत मोहानी
मुदावा-ए-दिल-ए-दीवाना करते
हसरत मोहानी
महरूम-ए-तरब है दिल-ए-दिल-गीर अभी तक
हसरत मोहानी
लुत्फ़ की उन से इल्तिजा न करें
हसरत मोहानी
क्या तुम को इलाज-ए-दिल-ए-शैदा नहीं आता
हसरत मोहानी
क्या काम उन्हें पुर्सिश-ए-अरबाब-ए-वफ़ा से
हसरत मोहानी