Love Poetry (page 136)

हमारे सामने बेगाना-वार आओ नहीं

फ़रीद जावेद

हमारे सामने बेगाना-वार आओ नहीं

फ़रीद जावेद

ग़ुबार दिल पे बहुत आ गया है धो लें आज

फ़रीद जावेद

अभी मकाँ मैं अभी सू-ए-ला-मकाँ हूँ मैं

फ़रीद जावेद

अभी मकाँ मैं अभी सू-ए-ला-मकाँ हूँ मैं

फ़रीद जावेद

यक़ीन

फ़रीद इशरती

तक़ाज़ा

फ़रीद इशरती

काग़ज़ के फूल

फ़रीद इशरती

जब तमन्नाएँ मुस्कुराती हैं

फ़रीद इशरती

ग़म का बादल

फ़रीद इशरती

फ़नकार और मौत

फ़रीद इशरती

बे-बाक अँधेरे

फ़रीद इशरती

अफ़्साना-ए-शब-रंग

फ़रीद इशरती

ज़ौक़-ए-परवाज़ में साबित हुआ सय्यारों से

फ़रीद इशरती

कुछ उन की जफ़ा उन का सितम याद नहीं है

फ़रीद इशरती

जला के दामन-ए-हस्ती का तार तार उठा

फ़रीद इशरती

है दाग़ दाग़ मिरा दिल मगर मलूल नहीं

फ़रीद इशरती

दिल में शगुफ़्ता गुल भी हैं रौशन चराग़ भी

फ़रीद इशरती

'फ़राज़' इस तरह ज़िंदगी है गुज़ारी

फ़राज़ सुल्तानपूरी

धूप की सख़्ती तो थी लेकिन 'फ़राज़'

फ़राज़ सुल्तानपूरी

वो अक्स-ए-दिल-ए-आश्ना छोड़ आए

फ़राज़ सुल्तानपूरी

बिछड़ते दामनों में अपनी कुछ परछाइयाँ रख दो

फ़राज़ सुल्तानपूरी

अश्क-ए-ग़म आँखों ने बरसाया बहुत

फ़राज़ सुल्तानपूरी

सदा-ए-कुन से भी पहले किसी जहान में थे

फ़राज़ महमूद फ़ारिज़

इस लिए दौड़ते ही ऐसे हैं

फ़राज़ महमूद फ़ारिज़

ज़िंदगी चुपके से इक बात कहा करती है

फ़रह इक़बाल

ज़रा सी रात ढल जाए तो शायद नींद आ जाए

फ़रह इक़बाल

वो मेरे बारे में ऐसे भी सोचता कब था

फ़रह इक़बाल

शिकायत हम नहीं करते रिआ'यत वो नहीं करते

फ़रह इक़बाल

सारे मंज़र दिलकश थे हर बात सुहानी लगती थी

फ़रह इक़बाल