Love Poetry (page 227)

कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा

अतहर नफ़ीस

इतने दिन के बाद तू आया है आज

अतहर नफ़ीस

हम भी बदल गए तिरी तर्ज़-ए-अदा के साथ साथ

अतहर नफ़ीस

फ़र्ज़ानों की इस बस्ती में एक अजब सौदाई है

अतहर नफ़ीस

दिल की मसर्रतें नई जाँ का मलाल है नया

अतहर नफ़ीस

बे-नियाज़ाना हर इक राह से गुज़रा भी करो

अतहर नफ़ीस

'अतहर' तुम ने इश्क़ किया कुछ तुम भी कहो क्या हाल हुआ

अतहर नफ़ीस

किस दर्जा मिरे शहर की दिलकश है फ़ज़ा भी

अतहर नादिर

उभरा जो चाँद ऊँघती परछाइयाँ मिलीं

अतहर अज़ीज़

सिसकते फूलों का कोई भी दर्द-मंद नहीं

अतहर अज़ीज़

दिल तो बरसाता है हर रोज़ ही ग़म के सावन

अतहर अज़ीज़

एक मंज़र

अतहर अदीब

आईना दूसरों की जानिब है

अतीया नियाज़ी

शब-गज़ीदा के घर नहीं आती

अतीया नियाज़ी

तुम और मैं

अतीया दाऊद

मोहब्बत की मंज़िल

अतीया दाऊद

काश समझदार न बनूँ

अतीया दाऊद

भरोसे का क़त्ल

अतीया दाऊद

अपनी बेटी के नाम

अतीया दाऊद

फिर सदा-ए-मोहब्बत सुनी है अभी

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

मिरी मुश्किल अगर आसाँ बना देते तो अच्छा था

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

जिस को चाहा था कब मिला मुझ को

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

अन-गिनत अज़ाब हैं रतजगों के दरमियाँ

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

कटी है उम्र यहाँ एक घर बनाने में

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

जिस को देखो वो गिरफ़्तार-ए-बला लगता है

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

आसमाँ गर्दिश में था सारी ज़मीं चक्कर में थी

अतीक़ मुज़फ़्फ़रपुरी

क़रीब से न गुज़र इंतिज़ार बाक़ी रख

अतीक़ असर

हर्फ़ लर्ज़ां हैं कि होंटों पे वो आएँ कैसे?

अतीक़ असर

घटा ज़ुल्फ़ों की जब से और काली होती जाती है

अतीक़ असर

ग़म ये नहीं कि ग़म से मुलाक़ात हुई

अतीक़ असर