Love Poetry (page 23)
मर गए पर भी न हो बोझ किसी पर अपना
इमदाद अली बहर
मैं उस बुत का वस्ल ऐ ख़ुदा चाहता हूँ
इमदाद अली बहर
मैं सियह-रू अपने ख़ालिक़ से जो ने'मत माँगता
इमदाद अली बहर
मैं गिला तुम से करूँ ऐ यार किस किस बात का
इमदाद अली बहर
महरम के सितारे टूटते हैं
इमदाद अली बहर
महबूब-ए-ख़ुदा ने तुझे नायाब बनाया
इमदाद अली बहर
किया सलाम जो साक़ी से हम ने जाम लिया
इमदाद अली बहर
ख़ुर्शीद-रुख़ों का सामना है
इमदाद अली बहर
ख़ुर्शीद फ़िराक़ में तपाँ है
इमदाद अली बहर
ख़ुदा-परस्त हुए हम न बुत-परस्त हुए
इमदाद अली बहर
ख़ूब-रूयान-ए-जहाँ चाँद की तनवीरें हैं
इमदाद अली बहर
ख़ूब-रू सब हैं मगर हूरा-शमाइल एक है
इमदाद अली बहर
कभी तो देखे हमारी अरक़-फ़िशानी धूप
इमदाद अली बहर
कभी देखें जो रू-ए-यार दरख़्त
इमदाद अली बहर
जिस को चाहो तुम उस को भर दो
इमदाद अली बहर
जज़्ब-ए-उल्फ़त ने दिखाया असर अपना उल्टा
इमदाद अली बहर
जाते है ख़ानक़ाह से वाइज़ सलाम है
इमदाद अली बहर
जल्वा-ए-अर्बाब-ए-दुनिया देखिए
इमदाद अली बहर
जड़ाव चूड़ियों के हाथों में फबन क्या ख़ूब
इमदाद अली बहर
जब कि सर पर वबाल आता है
इमदाद अली बहर
जब दस्त-बस्ता की नहीं उक़्दा-कुशा नमाज़
इमदाद अली बहर
इस तरह ज़ीस्त बसर की कोई पुरसाँ न हुआ
इमदाद अली बहर
इफ़्शा हुए असरार-ए-जुनूँ जामा-दरी से
इमदाद अली बहर
ईफ़ा-ए-व'अदा आप से ऐ यार हो चुका
इमदाद अली बहर
हम नाक़िसों के दौर में कामिल हुए तो क्या
इमदाद अली बहर
हम ख़िज़ाँ की अगर ख़बर रखते
इमदाद अली बहर
हम आज-कल हैं नामा-नवीसी की ताव पर
इमदाद अली बहर
हर तरफ़ मज्मा-ए-आशिक़ाँ है
इमदाद अली बहर
हम-ज़ाद है ग़म अपना शादाँ किसे कहते हैं
इमदाद अली बहर
हमीं नाशाद नज़र आते हैं दिल-शाद हैं सब
इमदाद अली बहर