Love Poetry (page 21)
इस लिए सब से अलग है मिरी ख़ुशबू 'आमी'
इमरान आमी
ज़ख़्म अब तक वही सीने में लिए फिरता हूँ
इमरान आमी
परिंदा आइने से क्या लड़ेगा
इमरान आमी
मैं सच कहूँ पस-ए-दीवार झूट बोलते हैं
इमरान आमी
कुछ एहतिमाम न था शाम-ए-ग़म मनाने को
इमरान आमी
कोई मेरा इमाम था ही नहीं
इमरान आमी
कोई मजनूँ कोई फ़रहाद बना फिरता है
इमरान आमी
जितने पानी में कोई डूब के मर सकता है
इमरान आमी
इस दश्त से आगे भी कोई दश्त-ए-गुमाँ है
इमरान आमी
हम-साए में शैतान भी रहता है ख़ुदा भी
इमरान आमी
एहतियातन उसे छुआ नहीं है
इमरान आमी
बात दिल को मिरे लगी नहीं है
इमरान आमी
रात चराग़ की महफ़िल में शामिल एक ज़माना था
इमदाद निज़ामी
काँटों में ही कुछ ज़र्फ़-ए-समाअत नज़र आए
इमदाद निज़ामी
मुफ़्त बोसा हसीं नहीं देते
इम्दाद इमाम असर
जब नहीं कुछ ए'तिबार-ए-ज़िंदगी
इम्दाद इमाम असर
हसीनों की जफ़ाएँ भी तलव्वुन से नहीं ख़ाली
इम्दाद इमाम असर
आइना देख के फ़रमाते हैं
इम्दाद इमाम असर
ज़बान-ए-हाल से हम शिकवा-ए-बेदाद करते हैं
इम्दाद इमाम असर
यूँही उलझी रहने दो क्यूँ आफ़त सर पर लाते हो
इम्दाद इमाम असर
ठिकाना है कहीं जाएँ कहाँ नाचार बैठे हैं
इम्दाद इमाम असर
सूली चढ़े जो यार के क़द पर फ़िदा न हो
इम्दाद इमाम असर
सुब्ह-दम रोती जो तेरी बज़्म से जाती है शम्अ
इम्दाद इमाम असर
रोते हैं सुन के कहानी मेरी
इम्दाद इमाम असर
क़ैद-ए-तन से रूह है नाशाद क्या
इम्दाद इमाम असर
मेरे सर में जो रात चक्कर था
इम्दाद इमाम असर
महफ़िल में उस पे रात जो तू मेहरबाँ न था
इम्दाद इमाम असर
लोग जब तेरा नाम लेते हैं
इम्दाद इमाम असर
क्यूँ देखिए न हुस्न-ए-ख़ुदा-दाद की तरफ़
इम्दाद इमाम असर
किसी का दिल को रहा इंतिज़ार सारी रात
इम्दाद इमाम असर