Love Poetry (page 25)

ऐन दानाई है 'नासिख़' इश्क़ में दीवानगी

इमाम बख़्श नासिख़

वो बेज़ार मुझ से हुआ ज़ार मैं हूँ

इमाम बख़्श नासिख़

सौ क़िस्सों से बेहतर है कहानी मिरे दिल की

इमाम बख़्श नासिख़

सनम कूचा तिरा है और मैं हूँ

इमाम बख़्श नासिख़

रिफ़अत कभी किसी की गवारा यहाँ नहीं

इमाम बख़्श नासिख़

मिरा सीना है मशरिक़ आफ़्ताब-ए-दाग़-ए-हिज्राँ का

इमाम बख़्श नासिख़

कौन सा तन है कि मिस्ल-ए-रूह इस में तू नहीं

इमाम बख़्श नासिख़

जान हम तुझ पे दिया करते हैं

इमाम बख़्श नासिख़

हैं अश्क मिरी आँखों में क़ुल्ज़ुम से ज़्यादा

इमाम बख़्श नासिख़

है मोहब्बत सब को उस के अबरू-ए-ख़मदार की

इमाम बख़्श नासिख़

है दिल-ए-सोज़ाँ में तूर उस की तजल्ली-गाह का

इमाम बख़्श नासिख़

दिल में पोशीदा तप-ए-इश्क़-ए-बुताँ रखते हैं

इमाम बख़्श नासिख़

चैन दुनिया में ज़मीं से ता-फ़लक दम भर नहीं

इमाम बख़्श नासिख़

आ गया जब से नज़र वो शोख़ हरजाई मुझे

इमाम बख़्श नासिख़

तेरी ख़ुशबू से मोअत्तर है ज़माना सारा

इमाम अाज़म

मौसम सूखा सूखा सा था लेकिन ये क्या बात हुई

इमाम अाज़म

गेसू ओ रुख़्सार की बातें करें

इमाम अाज़म

आस्था का रंग आ जाए अगर माहौल में

इमाम अाज़म

राखी बंधन

इमाम अाज़म

तुम्हारे जाते ही हर चश्म-ए-तर को देखते हैं

इमाम अाज़म

मौसम सूखा सूखा सा था लेकिन ये क्या बात हुई

इमाम अाज़म

जो मज़े आज तिरे ग़म के अज़ाबों में मिले

इमाम अाज़म

गेसू ओ रुख़्सार की बातें करें

इमाम अाज़म

गर्द-ओ-ग़ुबार धूप के आँचल पे छा गए

इमाम अाज़म

वही आग अपना नसीब थी कि तमाम उम्र जला किए

इलियास इश्क़ी

इस उलझन को सुलझाने की कौन सी है तदबीर लिखो

इलियास इश्क़ी

ये बहार वो है जहाँ रही असर-ए-ख़िज़ाँ से बरी रही

इलियास इश्क़ी

वक़्त वक़्त की बात है या दस्तूर है दुनिया का साईं

इलियास इश्क़ी

समझाने वालों ने कितना उन को समझाया लोगो

इलियास इश्क़ी

'इश्क़ी'-साहिब लिखना है तो कोई नई तहरीर लिखो

इलियास इश्क़ी