Love Poetry (page 26)

ज़ीस्त-मिज़ाजों का नौहा

इलियास बाबर आवान

यार परिंदे!

इलियास बाबर आवान

शत्तुल-अरब

इलियास बाबर आवान

शाही बदला

इलियास बाबर आवान

पागल

इलियास बाबर आवान

मस्जिद-ए-अहमरीं

इलियास बाबर आवान

हमारे दिन गुज़र गए

इलियास बाबर आवान

ग़ैर-निसाबी तारीख़

इलियास बाबर आवान

ये जो तरतीब से बना हुआ मैं

इलियास बाबर आवान

टूटी मेज़ और जली किताबें रह जाएँगी

इलियास बाबर आवान

सिर्फ़ आज़ार उठाने से कहाँ बनता है

इलियास बाबर आवान

रख़्त-ए-गुरेज़ गाम से आगे की बात है

इलियास बाबर आवान

कफ़ील-ए-साअ'त-ए-सय्यार रक्खा होता है

इलियास बाबर आवान

इश्क़ करता हूँ, तक़ाज़ा नहीं कर सकता मैं

इलियास बाबर आवान

हमारा आइना बे-कार हो गया तो फिर!

इलियास बाबर आवान

मंज़िलों का मैं पता भी दूँगा

इकराम तबस्सुम

और ही कहीं ठहरे और ही कहीं पहुँचे

इकराम मुजीब

क्या जाने किस की धुन में रहा दिल-फ़िगार चाँद

इकराम जनजुआ

ज़ब्त ने भींचा तो आ'साब की चीख़ें निकलीं

इकराम आज़म

नशात-ए-नौ की तलब है न ताज़ा ग़म का जिगर

इकराम आज़म

ले चले हो तो कहीं दूर ही ले जाना मुझे

इकराम आज़म

हर राहत-ए-जाँ लम्हे से उफ़्ताद की ज़िद है

इकराम आज़म

ज़बाँ से दिल का फ़साना अदा किया न गया

इज्तिबा रिज़वी

अफ़्सुर्दगी भी हुस्न है ताबिंदगी भी हुस्न

इज्तिबा रिज़वी

ख़िरद को ख़ाना-ए-दिल का निगह-बाँ कर दिया हम ने

इज्तिबा रिज़वी

इक अख़्गर-ए-जमाल फ़रोज़ाँ ब-शक्ल-ए-दिल

इज्तिबा रिज़वी

दिल है और ख़ुद नगरी ज़ौक़-ए-दुआ जिस को कहें

इज्तिबा रिज़वी

ये वस्ल की रुत है कि जुदाई का है मौसम

इफ़्तिख़ार राग़िब

इस शोख़ी-ए-गुफ़्तार पर आता है बहुत प्यार

इफ़्तिख़ार राग़िब

इंकार ही कर दीजिए इक़रार नहीं तो

इफ़्तिख़ार राग़िब