Love Poetry (page 28)
इस क़दर भी तो न जज़्बात पे क़ाबू रक्खो
इफ़्तिख़ार नसीम
हाथ लहराता रहा वो बैठ कर खिड़की के साथ
इफ़्तिख़ार नसीम
हाथ हाथों में न दे बात ही करता जाए
इफ़्तिख़ार नसीम
है जुस्तुजू अगर इस को इधर भी आएगा
इफ़्तिख़ार नसीम
चाँद फिर तारों की उजली रेज़गारी दे गया
इफ़्तिख़ार नसीम
बन गया है जिस्म गुज़रे क़ाफ़िलों की गर्द सा
इफ़्तिख़ार नसीम
मोहब्बत और इबादत में फ़र्क़ तो है नाँ
इफ़्तिख़ार मुग़ल
हम ने उस चेहरे को बाँधा नहीं महताब-मिसाल
इफ़्तिख़ार मुग़ल
आँख झपकी थी बस इक लम्हे को और इस के ब'अद
इफ़्तिख़ार मुग़ल
तुम्हें भी चाहा, ज़माने से भी वफ़ा की थी
इफ़्तिख़ार मुग़ल
सवाद-ए-हिज्र में रक्खा हुआ दिया हूँ मैं
इफ़्तिख़ार मुग़ल
रुख़्सत-ए-यार का मज़मून ब-मुश्किल बाँधा
इफ़्तिख़ार मुग़ल
रख-रखाव में कोई ख़्वार नहीं होता यार
इफ़्तिख़ार मुग़ल
मैं भी बे-अंत हूँ और तू भी है गहरा सहरा
इफ़्तिख़ार मुग़ल
कोई वजूद है दुनिया में कोई परछाईं
इफ़्तिख़ार मुग़ल
कभी कभी तो ये हालत भी की मोहब्बत ने
इफ़्तिख़ार मुग़ल
जमाल-गाह-ए-तग़ज़्ज़ुल की ताब-ओ-तब तिरी याद
इफ़्तिख़ार मुग़ल
ये तिरा बाँकपन ये रानाई
इफ़्तिख़ार जमील शाहीन
धुँद
इफ़्तेख़ार जालिब
चूमता पानी, पानी पानी
इफ़्तेख़ार जालिब
वो नहीं मिलता मुझे इस का गिला अपनी जगह
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
वो ख़्वाब था बिखर गया ख़याल था मिला नहीं
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
तू नहीं तो ज़िंदगी में और क्या रह जाएगा
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
अंदलीबों से कभी गुल से कभी लेता हूँ
इफ़्तिख़ार हुसैन रिज़वी सईद
रौशनी की डोर थामे ज़िंदगी तक आ गए
इफ़्तिख़ार फलक काज़मी
मलबे से जो मिली हैं वो लाशें दिखाइए
इफ़्तिख़ार फलक काज़मी
दर-ओ-दीवार ख़ुद-कुशी कर लें
इफ़्तिख़ार फलक काज़मी
आसाँ नहीं है जादा-ए-हैरत उबूरना
इफ़्तिख़ार फलक काज़मी
दश्त-ए-बे-सम्त में रुकना भी सफ़र ऐसा था
इफ़्तिख़ार बुख़ारी
दश्त-ए-बे-सम्त में रुकना भी सफ़र ऐसा था
इफ़्तिख़ार बुख़ारी