Love Poetry (page 29)
बे-ख़बर मुझ से मिरे दिल में हमेशा हँसता
इफ़्तिख़ार बुख़ारी
बनती है सँवरती है बिखर जाती है दुनिया
इफ़्तिख़ार बुख़ारी
ज़िंदगी भर की कमाई यही मिसरे दो-चार
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मिट्टी की मोहब्बत में हम आशुफ़्ता-सरों ने
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मिरा ख़ुश-ख़िराम बला का तेज़-ख़िराम था
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मैं ज़िंदगी की दुआ माँगने लगा हूँ बहुत
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मैं जिस को एक उम्र सँभाले फिरा किया
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मैं चुप रहा कि वज़ाहत से बात बढ़ जाती
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मैं अपने ख़्वाब से कट कर जियूँ तो मेरा ख़ुदा
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मआल-ए-इज़्ज़त-ए-सादात-ए-इश्क़ देख के हम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
कोई जुनूँ कोई सौदा न सर में रक्खा जाए
इफ़्तिख़ार आरिफ़
खुला फ़रेब-ए-मोहब्बत दिखाई देता है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
खज़ाना-ए-ज़र-ओ-गौहर पे ख़ाक डाल के रख
इफ़्तिख़ार आरिफ़
हम अपने रफ़्तगाँ को याद रखना चाहते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बहुत मुश्किल ज़मानों में भी हम अहल-ए-मोहब्बत
इफ़्तिख़ार आरिफ़
अजब तरह का है मौसम कि ख़ाक उड़ती है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
यक़ीन से यादों के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता
इफ़्तिख़ार आरिफ़
शहर-आशोब
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सौग़ात
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सहरा में एक शाम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
रौशन दिल वालों के नाम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
पुराने दुश्मन
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मुकालिमा
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मोहब्बत की एक नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
हवाएँ अन-पढ़ हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक उदास शाम के नाम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक शायर एक नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक ख़्वाब की दूरी पर
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक कहानी बहुत पुरानी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
दुआ
इफ़्तिख़ार आरिफ़