Love Poetry (page 27)
एक मौसम की कसक है दिल में दफ़्न
इफ़्तिख़ार राग़िब
दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
इफ़्तिख़ार राग़िब
तर्क-ए-तअल्लुक़ात नहीं चाहता था मैं
इफ़्तिख़ार राग़िब
तक़दीर-ए-वफ़ा का फूट जाना
इफ़्तिख़ार राग़िब
मुज़्तरिब आप के बिना है जी
इफ़्तिख़ार राग़िब
जी चाहता है जीना जज़्बात के मुताबिक़
इफ़्तिख़ार राग़िब
इंकार ही कर दीजिए इक़रार नहीं तो
इफ़्तिख़ार राग़िब
दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
इफ़्तिख़ार राग़िब
छोड़ा न मुझे दिल ने मिरी जान कहीं का
इफ़्तिख़ार राग़िब
चाहतों का सिलसिला है मुस्तक़िल
इफ़्तिख़ार राग़िब
अच्छे दिनों की आस लगा कर मैं ने ख़ुद को रोका है
इफ़्तिख़ार राग़िब
मिरी आँखों को आँखों का किनारा कौन देगा
इफ़्तिख़ार क़ैसर
हम से अपने गाँव की मिट्टी के घर छीने गए
इफ़्तिख़ार क़ैसर
दूर दूर तक सन्नाटा है कोई नहीं है पास
इफ़्तिख़ार क़ैसर
उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
इफ़्तिख़ार नसीम
मुझ से नफ़रत है अगर उस को तो इज़हार करे
इफ़्तिख़ार नसीम
कोई बादल मेरे तपते जिस्म पर बरसा नहीं
इफ़्तिख़ार नसीम
दीवार ओ दर झुलसते रहे तेज़ धूप में
इफ़्तिख़ार नसीम
वो मिला मुझ को न जाने ख़ोल कैसा ओढ़ कर
इफ़्तिख़ार नसीम
उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
इफ़्तिख़ार नसीम
तेरी आँखों की चमक बस और इक पल है अभी
इफ़्तिख़ार नसीम
सूरज नए बरस का मुझे जैसे डस गया
इफ़्तिख़ार नसीम
शाम से तन्हा खड़ा हूँ यास का पैकर हूँ मैं
इफ़्तिख़ार नसीम
सज़ा ही दी है दुआओं में भी असर दे कर
इफ़्तिख़ार नसीम
रात को बाहर अकेले घूमना अच्छा नहीं
इफ़्तिख़ार नसीम
न जाने कब वो पलट आएँ दर खुला रखना
इफ़्तिख़ार नसीम
मिशअल-ए-उम्मीद थामो रहनुमा जैसा भी है
इफ़्तिख़ार नसीम
किसी के हक़ में सही फ़ैसला हुआ तो है
इफ़्तिख़ार नसीम
जिला-वतन हूँ मिरा घर पुकारता है मुझे
इफ़्तिख़ार नसीम
इस तरह सोई हैं आँखें जागते सपनों के साथ
इफ़्तिख़ार नसीम