Love Poetry (page 258)
पिन्हाँ था ख़ुश-निगाहों की दीदार का मरज़
अरशद अली ख़ान क़लक़
परतव-ए-रुख़ का तिरे दिल में गुज़र रहता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का
अरशद अली ख़ान क़लक़
नहीं चमके ये हँसने में तुम्हारे दाँत अंजुम से
अरशद अली ख़ान क़लक़
न वो ख़ुशबू है गुलों में न ख़लिश ख़ारों में
अरशद अली ख़ान क़लक़
न कल तक थे वो मुँह लगाने के क़ाबिल
अरशद अली ख़ान क़लक़
मिलता है क़ैद-ए-ग़म में भी लुत्फ़-ए-फ़ज़ा-ए-बाग़
अरशद अली ख़ान क़लक़
लुत्फ़-ए-बहार मुश्फ़िक़-ए-मन देखते चलो
अरशद अली ख़ान क़लक़
लुट रही है दौलत-ए-दीदार क़ैसर-बाग़ में
अरशद अली ख़ान क़लक़
जुनूँ बरसाए पत्थर आसमाँ ने मज़रा-ए-जाँ पर
अरशद अली ख़ान क़लक़
जो साक़िया तू ने पी के हम को दिया है जाम-ए-शराब आधा
अरशद अली ख़ान क़लक़
इश्क़ में तेरे जान-ए-ज़ार हैफ़ है मुफ़्त में चली
अरशद अली ख़ान क़लक़
हुज़ूर-ए-ग़ैर तुम उश्शाक़ की तहक़ीर करते हो
अरशद अली ख़ान क़लक़
हम ने एहसान असीरी का न बर्बाद किया
अरशद अली ख़ान क़लक़
हम तो हों दिल से दूर रहें पास और लोग
अरशद अली ख़ान क़लक़
हैं तेग़-ए-नाज़-ए-यार के बिस्मिल अलग अलग
अरशद अली ख़ान क़लक़
गुलों पर साफ़ धोका हो गया रंगीं कटोरी का
अरशद अली ख़ान क़लक़
गर दिल में कर के सैर-ए-दिल-ए-दाग़-दार देख
अरशद अली ख़ान क़लक़
डोरा नहीं है सुरमे का चश्म-ए-सियाह में
अरशद अली ख़ान क़लक़
दिल में आते ही ख़ुशी साथ ही इक ग़म आया
अरशद अली ख़ान क़लक़
दाँतों से जबकि उस गुल-ए-तर के दबाए होंठ
अरशद अली ख़ान क़लक़
दफ़्तर जो गुलों के वो सनम खोल रहा है
अरशद अली ख़ान क़लक़
चश्मक-ज़नी में करती नहीं यार का लिहाज़
अरशद अली ख़ान क़लक़
बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को
अरशद अली ख़ान क़लक़
बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को
अरशद अली ख़ान क़लक़
बोलेगा कौन आशिक़-ए-नादार की तरफ़
अरशद अली ख़ान क़लक़
बे-ज़बानों को भी गोयाई सिखाना चाहिए
अरशद अली ख़ान क़लक़
बशर के फ़ैज़-ए-सोहबत से लियाक़त आ ही जाती है
अरशद अली ख़ान क़लक़
बाक़ी न हुज्जत इक दम-ए-इसबात रह गई
अरशद अली ख़ान क़लक़
अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़