Love Poetry (page 256)
मोहब्बत सिर्फ़ इक जज़्बा नहीं है
अरशद लतीफ़
किसी सूरत अगर इज़हार की सूरत निकल आए
अरशद लतीफ़
जब मैं उस आदमी से दूर हुआ
अरशद लतीफ़
एक सूरत तिरी बनाने में
अरशद लतीफ़
वो ज़माने का तग़य्युर हो कि मौसम का मिज़ाज
अरशद कमाल
नफ़ी ओ इसबात
अरशद कमाल
ख़दशा
अरशद कमाल
धूप छाँव के दरमियाँ
अरशद कमाल
ज़माना कुछ भी कहे तेरी आरज़ू कर लूँ
अरशद कमाल
तलातुम है न जाँ-लेवा भँवर है
अरशद कमाल
कुछ तो मिल जाए कहीं दीदा-ए-पुर-नम के सिवा
अरशद कमाल
कभी जो उस की तमन्ना ज़रा बिफर जाए
अरशद कमाल
फ़िक्र सोई है सर-ए-शाम जगा दी जाए
अरशद कमाल
दर्द की साकित नदी फिर से रवाँ होने को है
अरशद कमाल
ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए
अरशद कमाल
उन की फ़ितरत उस को कहिए या कि फ़ितरत का उसूल
अरशद काकवी
फिर चंद दिनों से वो हर शब ख़्वाबों में हमारे आते हैं
अरशद काकवी
जीना है एक शग़्ल सो करते रहे हैं हम
अरशद काकवी
ज़िंदगी तू भी हमें वैसे ही इक रोज़ गुज़ार
अरशद जमाल 'सारिम'
ज़िंदगी हम से तिरी आँख-मिचोली कब तक
अरशद जमाल 'सारिम'
ऐसी ही बे-चेहरगी छाई हुई है शहर में
अरशद जमाल 'सारिम'
ये ख़ाकी पैरहन इक इस्म की बंदिश में रहता है
अरशद जमाल 'सारिम'
प्यास हर ज़र्रा-ए-सहरा की बुझाई गई है
अरशद जमाल 'सारिम'
पलट कर देखने का मुझ में यारा ही नहीं था
अरशद जमाल 'सारिम'
नित-नए नक़्श से बातिन को सजाता हुआ मैं
अरशद जमाल 'सारिम'
क्या कहूँ कितनी अज़िय्यत से निकाली गई शब
अरशद जमाल 'सारिम'
क्या कहूँ कितना फ़ुज़ूँ है तेरे दीवाने का दुख
अरशद जमाल 'सारिम'
किश्त-ए-एहसास में थोड़ा सा मिला लेंगे तुझे
अरशद जमाल 'सारिम'
फ़ना हुआ तो मैं तार-ए-नफ़स में लौट आया
अरशद जमाल 'सारिम'
दिखाती है जो ये दुनिया वो बैठा देखता हूँ मैं
अरशद जमाल 'सारिम'