Love Poetry (page 255)

रक़्स-ए-आशुफ़्ता-सरी की कोई तदबीर सही

अर्शी भोपाली

निगाह-ए-शौक़ से कब तक मुक़ाबला करते

अर्शी भोपाली

निगाह तेज़ शुऊ'र-ए-बुलंद रखते हैं

अर्शी भोपाली

नशीली छाँव में बीते हुए ज़मानों को

अर्शी भोपाली

मता-ए-शौक़ तो है दर्द-ए-रोज़गार तो है

अर्शी भोपाली

ख़ुलूस-ए-अल्फ़ाज़ काम आया निगाह-ए-अहल-ए-फ़ितन से पहले

अर्शी भोपाली

कारवाँ तीरा-शब में चलते हैं

अर्शी भोपाली

फ़लसफ़ी किस लिए इल्ज़ाम-ए-फ़ना देता है

अर्शी भोपाली

दर्द के साँचे में ढल कर रह गई

अर्शी भोपाली

आग़ाज़-ए-आशिक़ी का अल्लाह रे ज़माना

अर्शी भोपाली

वीराँ वीराँ बाम-ओ-दर मैं और मिरी तन्हाई

अरशदुल क़ादरी

सब रंग वही ढंग वही नाज़ वही थे

अरशदुल क़ादरी

मुख़ालिफ़ों के जिलौ में वो आज शामिल था

अरशदुल क़ादरी

हमें मिट के भी ये हसरत कि भटकते उस गली में

अरशद सिद्दीक़ी

वो जिस ने मेरे दिल ओ जाँ में दर्द बोया है

अरशद सिद्दीक़ी

क़ल्ब-ओ-नज़र का सुकूँ और कहाँ दोस्तो

अरशद सिद्दीक़ी

न पयाम चाहते हैं न कलाम चाहते हैं

अरशद सिद्दीक़ी

दिलों से यास-ओ-अलम के नक़ाब उतारो तो

अरशद सिद्दीक़ी

तुम्हारे जम्परों पर साड़ियों पर और ग़रारों पर

अरशद मीर

लहू के साथ तबीअत में सनसनाती फिरे

अरशद मलिक

नए मौसम की बशारत हैं हम

अरशद महमूद नाशाद

मैं ख़ाक छानता हूँ आफ़्ताब देखता हूँ

अरशद महमूद नाशाद

हम जुनूँ पेशा कि रहते थे तिरी ज़ात में गुम

अरशद महमूद नाशाद

ज़मीं की कोख से पहले शजर निकालता है

अरशद महमूद अरशद

मैं ने उसी से हाथ मिलाया था और बस

अरशद महमूद अरशद

कहीं तो फेंक ही देंगे ये बार साँसों का

अरशद महमूद अरशद

कोई तो मोजज़ा ऐसा भी हो अपनी मोहब्बत में

अरशद लतीफ़

जब मैं उस आदमी से दूर हुआ

अरशद लतीफ़

तिरे ख़याल से फिर आँख मेरी पुर-नम है

अरशद लतीफ़

सुरूर-ए-इश्क़ ने उल्फ़त से बाँध रक्खा है

अरशद लतीफ़