Love Poetry (page 257)
बे-अमाँ हूँ इन दिनों मैं दर-ब-दर फिरता हूँ मैं
अरशद जमाल 'सारिम'
बस कि इक लम्स की उम्मीद पे वारे हुए हैं
अरशद जमाल 'सारिम'
यही इंसाफ़ तिरे अहद में है ऐ शह-ए-हुस्न
अरशद अली ख़ान क़लक़
फिर गया आँखों में उस कान के मोती का ख़याल
अरशद अली ख़ान क़लक़
मुझ से उन आँखों को वहशत है मगर मुझ को है इश्क़
अरशद अली ख़ान क़लक़
लाग़र ऐसा वहशत-ए-इश्क़-ए-लब-ए-शीरीं में हूँ
अरशद अली ख़ान क़लक़
ख़ुश-क़दों से कभी आलम न रहेगा ख़ाली
अरशद अली ख़ान क़लक़
ख़रीदारी-ए-जिंस-ए-हुस्न पर रग़बत दिलाता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
काबे से खींच लाया हम को सनम-कदे में
अरशद अली ख़ान क़लक़
हज़रत-ए-इश्क़ ने दोनों को किया ख़ाना-ख़राब
अरशद अली ख़ान क़लक़
बराबर एक से मिस्रा नज़र आते हैं अबरू के
अरशद अली ख़ान क़लक़
ऐ परी-ज़ाद जो तू रक़्स करे मस्ती में
अरशद अली ख़ान क़लक़
ऐ बे-ख़ुदी-ए-दिल मुझे ये भी ख़बर नहीं
अरशद अली ख़ान क़लक़
अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
ये जी में आता है जल जल के हर ज़माँ नासेह
अरशद अली ख़ान क़लक़
ये बोले जो उन को कहा बे-मुरव्वत
अरशद अली ख़ान क़लक़
ये बारीक उन की कमर हो गई
अरशद अली ख़ान क़लक़
यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा
अरशद अली ख़ान क़लक़
यगाना उन का बेगाना है बेगाना यगाना है
अरशद अली ख़ान क़लक़
वाइज़ की ज़िद से रिंदों ने रस्म-ए-जदीद की
अरशद अली ख़ान क़लक़
वा'दा-ख़िलाफ़ कितने हैं ऐ रश्क-ए-माह आप
अरशद अली ख़ान क़लक़
था क़स्द-ए-क़त्ल-ए-ग़ैर मगर मैं तलब हुआ
अरशद अली ख़ान क़लक़
तासीर जज़्ब मस्तों की हर हर ग़ज़ल में है
अरशद अली ख़ान क़लक़
सोते हैं फैल फैल के सारे पलंग पर
अरशद अली ख़ान क़लक़
सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
शरफ़ इंसान को कब ज़िल्ल-ए-हुमा देता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
सैर करते उसे देखा है जो बाज़ारों में
अरशद अली ख़ान क़लक़
साफ़ बातों से हो गया मा'लूम
अरशद अली ख़ान क़लक़
रोज़-ए-अव्वल से असीर ऐ दिल-ए-नाशाद हैं हम
अरशद अली ख़ान क़लक़
रग-ओ-पै में भरा है मेरे शोर उस की मोहब्बत का
अरशद अली ख़ान क़लक़