Love Poetry (page 314)

मताअ-ए-राएगाँ

अख़्तर-उल-ईमान

मस्जिद

अख़्तर-उल-ईमान

ख़मीर

अख़्तर-उल-ईमान

कार-नामा

अख़्तर-उल-ईमान

काले सफ़ेद परों वाला परिंदा और मेरी एक शाम

अख़्तर-उल-ईमान

इत्तिफ़ाक़

अख़्तर-उल-ईमान

एक लड़का

अख़्तर-उल-ईमान

एक एहसास

अख़्तर-उल-ईमान

बुलावा

अख़्तर-उल-ईमान

बिंत-ए-लम्हात

अख़्तर-उल-ईमान

बे-चारगी

अख़्तर-उल-ईमान

बाज़-आमद --- एक मुन्ताज

अख़्तर-उल-ईमान

अपाहिज गाड़ी का आदमी

अख़्तर-उल-ईमान

आख़िरी मुलाक़ात

अख़्तर-उल-ईमान

कोई इलाज-ए-ग़म-ए-ज़िंदगी बता वाइज़

अख़्तर ज़ियाई

फिर वही शब के सराबों का चलन!

अख़्तर ज़ियाई

ग़म का आहंग है

अख़्तर ज़ियाई

आईना देखता हूँ

अख़्तर ज़ियाई

मिला जो कोई यहाँ रम्ज़-आशना न मुझे

अख़्तर ज़ियाई

दिन ढला शब हुई चराग़ जले

अख़्तर ज़ियाई

अहद-ए-वफ़ा का क़र्ज़ अदा कर दिया गया

अख़्तर ज़ियाई

शश-जिहत

अख़्तर उस्मान

नए सुर की तमसील

अख़्तर उस्मान

मैं अजब आदमी हूँ

अख़्तर उस्मान

गर्द-बाद

अख़्तर उस्मान

अपने पहले मकान तक हो आऊँ

अख़्तर उस्मान

तेरा हर राज़ छुपाए हुए बैठा है कोई

अख़्तर सिद्दीक़ी

तेरा हर राज़ छुपाए हुए बैठा है कोई

अख़्तर सिद्दीक़ी

वो मुस्कुरा के कोई बात कर रहा था 'शुमार'

अख्तर शुमार

मैं ज़िंदगी के सफ़र में था मश्ग़ला उस का

अख्तर शुमार