Love Poetry (page 313)
गहरी सूनी राह और तन्हा सा मैं
अकरम नक़्क़ाश
दश्त को ढूँडने निकलूँ तो जज़ीरा निकले
अकरम नक़्क़ाश
ब-रंग-ए-ख़्वाब मैं बिखरा रहूँगा
अकरम नक़्क़ाश
ऐ अब्र-ए-इल्तिफ़ात तिरा ए'तिबार फिर
अकरम नक़्क़ाश
यूँ ही रक्खोगे इम्तिहाँ में क्या
अकरम महमूद
सितारा आँख में दिल में गुलाब क्या रखना
अकरम महमूद
मंज़िल-ए-ख़्वाब है और महव-ए-सफ़र पानी है
अकरम महमूद
कोई हुनर तो मिरी चश्म-ए-अश्क-बार में है
अकरम महमूद
चढ़े हुए हैं जो दरिया उतर भी जाएँगे
अकरम महमूद
अगर हर चीज़ में उस ने असर रक्खा हुआ है
अकरम महमूद
अब दिल भी दुखाओ तो अज़िय्यत नहीं होती
अकरम महमूद
आँख खुलने पे भी होता हूँ उसी ख़्वाब में गुम
अकरम महमूद
ज़िंदगी तेरे अजब ठोर-ठिकाने निकले
अकमल इमाम
सिलसिले हादसों के ध्यान में रख
अकमल इमाम
प्यार इश्क़ हमदर्दी और दोस्ती साज़िश
अकमल इमाम
हिज्र की शाम से ज़ख़्मों के दोशाले माँगूँ
अकमल इमाम
गुज़रते दौड़ते लम्हे हिसाब में लिखिए
अकमल इमाम
ज़िंदगी का वक़्फ़ा
अख़्तर-उल-ईमान
यादें
अख़्तर-उल-ईमान
उम्र-ए-गुरेज़ाँ के नाम
अख़्तर-उल-ईमान
तर्ग़ीब और उस के ब'अद
अख़्तर-उल-ईमान
तन्हाई में
अख़्तर-उल-ईमान
तब्दीली
अख़्तर-उल-ईमान
सुकून
अख़्तर-उल-ईमान
सिलसिले
अख़्तर-उल-ईमान
सब्ज़ा-ए-बेगाना
अख़्तर-उल-ईमान
राह-ए-फ़रार
अख़्तर-उल-ईमान
पस-मंज़र
अख़्तर-उल-ईमान
मुफ़ाहमत
अख़्तर-उल-ईमान
मेरा दोस्त अबुल-हौल
अख़्तर-उल-ईमान