Love Poetry (page 322)

कुछ नक़्श हुवैदा हैं ख़यालों की डगर से

अख़्तर होशियारपुरी

किसे ख़बर जब मैं शहर-ए-जाँ से गुज़र रहा था

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाहिशें इतनी बढ़ीं इंसान आधा रह गया

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाब-महल में कौन सर-ए-शाम आ कर पत्थर मारता है

अख़्तर होशियारपुरी

जो मुझ को देख के कल रात रो पड़ा था बहुत

अख़्तर होशियारपुरी

हम अक्सर तीरगी में अपने पीछे छुप गए हैं

अख़्तर होशियारपुरी

होंटों पे क़र्ज़-ए-हर्फ़-ए-वफ़ा उम्र भर रहा

अख़्तर होशियारपुरी

हर्फ़-ए-बे-आवाज़ से दहका हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

इक नूर था कि पिछले पहर हम-सफ़र हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

एक हम ही तो नहीं आबला-पा आवारा

अख़्तर होशियारपुरी

दिल में इक जज़्बा-ए-बेदाद-ओ-जफ़ा ही होगा

अख़्तर होशियारपुरी

दश्त-दर-दश्त अक्स-ए-दर है यहाँ

अख़्तर होशियारपुरी

दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो

अख़्तर होशियारपुरी

बारहा ठिठका हूँ ख़ुद भी अपना साया देख कर

अख़्तर होशियारपुरी

अपने क़दमों ही की आवाज़ से चौंका होता

अख़्तर होशियारपुरी

अपना साया भी न हम-राह सफ़र में रखना

अख़्तर होशियारपुरी

आग चूल्हे की बुझी जाती है

अख़्तर होशियारपुरी

चाहो तो मिरा दुख मिरा आज़ार न समझो

अख़तर बस्तवी

ज़ुल्म सहते रहे शुक्र करते रहे आई लब तक न ये दास्ताँ आज तक

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ज़िंदगी होगी मिरी ऐ ग़म-ए-दौराँ इक रोज़

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ज़बान बंद रही दिल का मुद्दआ' न कहा

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

यूँ बदलती है कहीं बर्क़-ओ-शरर की सूरत

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ये रंग-ओ-कैफ़ कहाँ था शबाब से पहले

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ये मोहब्बत की जवानी का समाँ है कि नहीं

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

यारों के इख़्लास से पहले दिल का मिरे ये हाल न था

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

शराब आए तो कैफ़-ओ-असर की बात करो

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

शाइरो हद्द-ए-क़दामत से निकल कर देखो

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

सहारा दे नहीं सकते शिकस्ता पाँव को

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

रहने दे ये तंज़ के नश्तर अहल-ए-जुनूँ बेबाक नहीं

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

रहबर-ए-तब्ल-ओ-निशाँ और ज़रा तेज़ क़दम

अख़्तर अंसारी अकबराबादी