Love Poetry (page 323)
नज़र से सफ़्हा-ए-आलम पे ख़ूनीं दास्ताँ लिखिए
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
नहीं आसान तर्क-ए-इश्क़ करना दिल से ग़म जाना
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
नदीम बाग़ में जोश-ए-नुमू की बात न कर
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
न राज़-ए-इब्तिदा समझो न राज़-ए-इंतिहा समझो
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
लुटाओ जान तो बनती है बात किस ने कहा
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
कोशिश-ए-पैहम को सई-ए-राएगाँ कहते रहो
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
हर लम्हा अता करता है पैमाना सा इक शख़्स
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
फ़सुर्दा हो के मयख़ाने से निकले
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
दूर तक रौशनी है ग़ौर से देख
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
वो माज़ी जो है इक मजमुआ अश्कों और आहों का
अख़्तर अंसारी
उस से पूछे कोई चाहत के मज़े
अख़्तर अंसारी
शबाब-ए-दर्द मिरी ज़िंदगी की सुब्ह सही
अख़्तर अंसारी
शबाब नाम है उस जाँ-नवाज़ लम्हे का
अख़्तर अंसारी
रगों में दौड़ती हैं बिजलियाँ लहू के एवज़
अख़्तर अंसारी
मिला के क़तरा-ए-शबनम में रंग ओ निकहत-ए-गुल
अख़्तर अंसारी
कोई मआल-ए-मोहब्बत मुझे बताओ नहीं
अख़्तर अंसारी
जब से मुँह को लग गई 'अख़्तर' मोहब्बत की शराब
अख़्तर अंसारी
हाँ कभी ख़्वाब-ए-इश्क़ देखा था
अख़्तर अंसारी
अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं
अख़्तर अंसारी
ऐ सोज़-ए-जाँ-गुदाज़ अभी मैं जवान हूँ
अख़्तर अंसारी
ये सनम रिवायत-ओ-नक़्ल के हुबल-ओ-मनात से कम नहीं
अख़्तर अंसारी
ये हसीन फ़ितरत के हुस्न का अनीला-पन
अख़्तर अंसारी
सुनने वाले फ़साना तेरा है
अख़्तर अंसारी
सीना ख़ूँ से भरा हुआ मेरा
अख़्तर अंसारी
शोले भड़काओ देखते क्या हो
अख़्तर अंसारी
शोले भड़काओ देखते क्या हो
अख़्तर अंसारी
सरशार हूँ छलकते हुए जाम की क़सम
अख़्तर अंसारी
साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं
अख़्तर अंसारी
सदा कुछ ऐसी मिरे गोश-ए-दिल में आती है
अख़्तर अंसारी
पुर-कैफ़ ज़ियाएँ होती हैं पुर-नूर उजाले होते हैं
अख़्तर अंसारी