Love Poetry (page 324)
फूल सूँघे जाने क्या याद आ गया
अख़्तर अंसारी
मुतरिब-ए-दिल की वो तानें क्या हुईं
अख़्तर अंसारी
मोहब्बत करने वालों के बहार-अफ़रोज़ सीनों में
अख़्तर अंसारी
मोहब्बत है अज़िय्यत है हुजूम-ए-यास-ओ-हसरत है
अख़्तर अंसारी
मेरे रुख़ से सुकूँ टपकता है
अख़्तर अंसारी
मैं दिल को चीर के रख दूँ ये एक सूरत है
अख़्तर अंसारी
लुत्फ़ ले ले के पिए हैं क़दह-ए-ग़म क्या क्या
अख़्तर अंसारी
क्या ख़बर थी इक बला-ए-ना-गहानी आएगी
अख़्तर अंसारी
कोई मआल-ए-मोहब्बत मुझे बताओ नहीं
अख़्तर अंसारी
किसी से लड़ाएँ नज़र और झेलें मोहब्बत के ग़म इतनी फ़ुर्सत कहाँ
अख़्तर अंसारी
ख़्वाहिश-ए-ऐश नहीं दर्द-ए-निहानी की क़सम
अख़्तर अंसारी
ख़िज़ाँ में आग लगाओ बहार के दिन हैं
अख़्तर अंसारी
जो दाग़ बन के तमन्ना तमाम हो जाए
अख़्तर अंसारी
जाँ-सिपारी के भी अरमाँ ज़िंदगी की आस भी
अख़्तर अंसारी
हर वक़्त नौहा-ख़्वाँ सी रहती हैं मेरी आँखें
अख़्तर अंसारी
ग़म-ज़दा हैं मुब्तला-ए-दर्द हैं नाशाद हैं
अख़्तर अंसारी
ग़म-ए-हयात कहानी है क़िस्सा-ख़्वाँ हूँ मैं
अख़्तर अंसारी
दिन मुरादों के ऐश की रातें
अख़्तर अंसारी
दिल-ए-फ़सुर्दा में कुछ सोज़ ओ साज़ बाक़ी है
अख़्तर अंसारी
दिल के अरमान दिल को छोड़ गए
अख़्तर अंसारी
चीर कर सीने को रख दे गर न पाए ग़म-गुसार
अख़्तर अंसारी
चर्ख़ की सई-ए-जफ़ा कोशिश नाकारा है
अख़्तर अंसारी
बहार-ए-फ़िक्र के जल्वे लुटा दिए हम ने
अख़्तर अंसारी
बहार आई ज़माना हुआ ख़राबाती
अख़्तर अंसारी
अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं
अख़्तर अंसारी
अपनी बहार पे हँसने वालो कितने चमन ख़ाशाक हुए
अख़्तर अंसारी
आरज़ू को रूह में ग़म बन के रहना आ गया
अख़्तर अंसारी
आईना-ए-निगाह में अक्स-ए-शबाब है
अख़्तर अंसारी
आफ़तों में घिर गया हूँ ज़ीस्त से बे-ज़ार हूँ
अख़्तर अंसारी
हमें हर आने वाला ज़ख़्म-ए-ताज़ा दे के जाता है
अख़्तर अमान