Love Poetry (page 326)

हँसना रोना पाना खोना मरना जीना पानी पर

अखिलेश तिवारी

गुत्थी न सुलझ पाई गो सुलझाई बहुत है

अखिलेश तिवारी

वो हज़ार हम पे जफ़ा सही कोई शिकवा फिर भी रवा नहीं

अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी

ख़ुद नज़ारों पे नज़ारों को हँसी आती है

अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी

जुनून-ए-इश्क़ का जो कुछ हुआ अंजाम क्या कहिए

अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी

इतना भी नहीं करते इंकार चले आओ

अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी

हंगामा-ए-आफ़ात इधर भी है उधर भी

अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी

ये सारी धूल मिरी है ये सब ग़ुबार मिरा

अकबर मासूम

ये सारे फूल ये पत्थर उसी से मिलते हैं

अकबर मासूम

ये जो इक शाख़ है हरी थी अभी

अकबर मासूम

उस ख़ुश-अदा के आइना-ख़ाने में जाऊँगा

अकबर मासूम

सुन! हिज्र और विसाल का जादू कहाँ गया

अकबर मासूम

अब भी अक्सर ध्यान तुम्हारा आता है

अकबर मासूम

लुटाऊँ मस्तियाँ सरसब्ज़ रहगुज़र की तरह

अकबर काज़मी

पहुँच के जो सर-ए-मंज़िल बिछड़ गया मुझ से

अकबर हैदराबादी

बुरे भले में फ़र्क़ है ये जानते हैं सब मगर

अकबर हैदराबादी

आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है

अकबर हैदराबादी

वारिस

अकबर हैदराबादी

जाना-पहचाना अजनबी

अकबर हैदराबादी

हर्फ़-ए-यक़ीं

अकबर हैदराबादी

दश्त-ए-अदम का सन्नाटा

अकबर हैदराबादी

ये कौन मेरी तिश्नगी बढ़ा बढ़ा के चल दिया

अकबर हैदराबादी

सितम-ज़दा कई बशर क़दम क़दम पे थे

अकबर हैदराबादी

सायों से भी डर जाते हैं कैसे कैसे लोग

अकबर हैदराबादी

निगह-ए-शौक़ से हुस्न-ए-गुल-ओ-गुलज़ार तो देख

अकबर हैदराबादी

कुल आलम-ए-वुजूद कि इक दश्त-ए-नूर था

अकबर हैदराबादी

जिन पे अजल तारी थी उन को ज़िंदा करता है

अकबर हैदराबादी

जिन के नसीब में आब-ओ-दाना कम कम होता है

अकबर हैदराबादी

हाँ यही शहर मिरे ख़्वाबों का गहवारा था

अकबर हैदराबादी

घुटन अज़ाब-ए-बदन की न मेरी जान में ला

अकबर हैदराबादी