Love Poetry (page 328)
लोग कहते हैं कि बद-नामी से बचना चाहिए
अकबर इलाहाबादी
लगावट की अदा से उन का कहना पान हाज़िर है
अकबर इलाहाबादी
किस नाज़ से कहते हैं वो झुँझला के शब-ए-वस्ल
अकबर इलाहाबादी
जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर
अकबर इलाहाबादी
जवानी की है आमद शर्म से झुक सकती हैं आँखें
अकबर इलाहाबादी
जवानी की दुआ लड़कों को ना-हक़ लोग देते हैं
अकबर इलाहाबादी
इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अकबर इलाहाबादी
इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है
अकबर इलाहाबादी
हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना
अकबर इलाहाबादी
अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा
अकबर इलाहाबादी
नई तहज़ीब
अकबर इलाहाबादी
मिस सीमीं बदन
अकबर इलाहाबादी
मदरसा अलीगढ़
अकबर इलाहाबादी
जल्वा-ए-दरबार-ए-देहली
अकबर इलाहाबादी
फ़र्ज़ी लतीफ़ा
अकबर इलाहाबादी
बर्क़-ए-कलीसा
अकबर इलाहाबादी
ज़िद है उन्हें पूरा मिरा अरमाँ न करेंगे
अकबर इलाहाबादी
यूँ मिरी तब्अ से होते हैं मआनी पैदा
अकबर इलाहाबादी
ये सुस्त है तो फिर क्या वो तेज़ है तो फिर क्या
अकबर इलाहाबादी
वो हवा न रही वो चमन न रहा वो गली न रही वो हसीं न रहे
अकबर इलाहाबादी
वज़्न अब उन का मुअ'य्यन नहीं हो सकता कुछ
अकबर इलाहाबादी
उन्हें निगाह है अपने जमाल ही की तरफ़
अकबर इलाहाबादी
उम्मीद टूटी हुई है मेरी जो दिल मिरा था वो मर चुका है
अकबर इलाहाबादी
तिरी ज़ुल्फ़ों में दिल उलझा हुआ है
अकबर इलाहाबादी
तरीक़-ए-इश्क़ में मुझ को कोई कामिल नहीं मिलता
अकबर इलाहाबादी
शेख़ ने नाक़ूस के सुर में जो ख़ुद ही तान ली
अकबर इलाहाबादी
फिर गई आप की दो दिन में तबीअ'त कैसी
अकबर इलाहाबादी
नई तहज़ीब से साक़ी ने ऐसी गर्म-जोशी की
अकबर इलाहाबादी
न बहते अश्क तो तासीर में सिवा होते
अकबर इलाहाबादी
मिल गया शरअ से शराब का रंग
अकबर इलाहाबादी