Love Poetry (page 329)
मेरी तक़दीर मुआफ़िक़ न थी तदबीर के साथ
अकबर इलाहाबादी
मेरे हवास-ए-इश्क़ में क्या कम हैं मुंतशिर
अकबर इलाहाबादी
मज़हब का हो क्यूँकर इल्म-ओ-अमल दिल ही नहीं भाई एक तरफ़
अकबर इलाहाबादी
मअ'नी को भुला देती है सूरत है तो ये है
अकबर इलाहाबादी
क्या ही रह रह के तबीअ'त मिरी घबराती है
अकबर इलाहाबादी
ख़ुशी क्या हो जो मेरी बात वो बुत मान जाता है
अकबर इलाहाबादी
ख़ुशी है सब को कि ऑपरेशन में ख़ूब निश्तर ये चल रहा है
अकबर इलाहाबादी
ख़ुदा अलीगढ़ की मदरसे को तमाम अमराज़ से शिफ़ा दे
अकबर इलाहाबादी
कहाँ वो अब लुत्फ़-ए-बाहमी है मोहब्बतों में बहुत कमी है
अकबर इलाहाबादी
जो तुम्हारे लब-ए-जाँ-बख़्श का शैदा होगा
अकबर इलाहाबादी
जज़्बा-ए-दिल ने मिरे तासीर दिखलाई तो है
अकबर इलाहाबादी
जल्वा अयाँ है क़ुदरत-ए-परवरदिगार का
अकबर इलाहाबादी
जहाँ में हाल मिरा इस क़दर ज़बून हुआ
अकबर इलाहाबादी
जब यास हुई तो आहों ने सीने से निकलना छोड़ दिया
अकबर इलाहाबादी
इश्क़-ए-बुत में कुफ़्र का मुझ को अदब करना पड़ा
अकबर इलाहाबादी
हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो
अकबर इलाहाबादी
हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना
अकबर इलाहाबादी
हवा-ए-शब भी है अम्बर-अफ़्शाँ उरूज भी है मह-ए-मुबीं का
अकबर इलाहाबादी
हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए
अकबर इलाहाबादी
हर इक ये कहता है अब कार-ए-दीं तो कुछ भी नहीं
अकबर इलाहाबादी
हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
अकबर इलाहाबादी
हल्क़े नहीं हैं ज़ुल्फ़ के हल्क़े हैं जाल के
अकबर इलाहाबादी
हाल-ए-दिल मैं सुना नहीं सकता
अकबर इलाहाबादी
ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता
अकबर इलाहाबादी
गले लगाएँ करें प्यार तुम को ईद के दिन
अकबर इलाहाबादी
फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं
अकबर इलाहाबादी
इक बोसा दीजिए मिरा ईमान लीजिए
अकबर इलाहाबादी
दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
अकबर इलाहाबादी
दिल मिरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला
अकबर इलाहाबादी
दिल हो ख़राब दीन पे जो कुछ असर पड़े
अकबर इलाहाबादी