Love Poetry (page 327)

दिल दबा जाता है कितना आज ग़म के बार से

अकबर हैदराबादी

बस इक तसलसुल-ए-तकरार-ए-क़ुर्ब-ओ-दूरी था

अकबर हैदराबादी

बदन से रिश्ता-ए-जाँ मो'तबर न था मेरा

अकबर हैदराबादी

अता हुई किसे सनद नज़र नज़र की बात है

अकबर हैदराबादी

आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है

अकबर हैदराबादी

दिल है न निशान बे-दिली का

अकबर हुसैन मोहानी इबरत

किसी को अपने सिवा कुछ नज़र नहीं आता

अकबर हमीदी

तमाम आलम-ए-इम्काँ मिरे गुमान में है

अकबर हमीदी

शरार-ए-संग जो इस शोर-ओ-शर से निकलेगा

अकबर हमीदी

कहते हैं हम उधर हैं सितारा है जिस तरफ़

अकबर हमीदी

कहा था उस ने मोहब्बत की आबरू रखना

अकबर हमीदी

काफ़िर था मैं ख़ुदा का न मुंकिर दुआ का था

अकबर हमीदी

हू-ब-हू आप ही की मूरत है

अकबर हमीदी

हरीफ़-ए-गर्दिश-ए-अय्याम तो बने हुए हैं

अकबर हमीदी

हँसी में साग़र-ए-ज़र्रीं खनक खनक जाए

अकबर हमीदी

गई गुज़री कहानी लग रही है

अकबर हमीदी

देखने को कोई तय्यार नहीं है भाई

अकबर हमीदी

मौत उस बेकस की ग़ायत ही सही

अकबर हैदरी

क्या कहूँ जज़्बात का तूफ़ान कितना तेज़ है

अकबर हैदरी

किस चमन की ख़ाक में फूलों का मुस्तक़बिल नहीं

अकबर हैदरी

हर नफ़स मिन्नत-कश-ए-आलाम है

अकबर हैदरी

आह ऐ सौदा-ए-ख़ाम-ए-आरज़ू

अकबर हैदरी

ये दिलबरी ये नाज़ ये अंदाज़ ये जमाल

अकबर इलाहाबादी

उन्हें भी जोश-ए-उल्फ़त हो तो लुत्फ़ उट्ठे मोहब्बत का

अकबर इलाहाबादी

समझ में साफ़ आ जाए फ़साहत इस को कहते हैं

अकबर इलाहाबादी

सब हो चुके हैं उस बुत-ए-काफ़िर-अदा के साथ

अकबर इलाहाबादी

रह-ओ-रस्म-ए-मोहब्बत इन हसीनों से मैं क्या रक्खूँ

अकबर इलाहाबादी

मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ

अकबर इलाहाबादी

मेरे हवास इश्क़ में क्या कम हैं मुंतशिर

अकबर इलाहाबादी

मय भी होटल में पियो चंदा भी दो मस्जिद में

अकबर इलाहाबादी